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डिजिटल गोल्ड से चमकेगा भारत! GenZ बदलेगा ₹4.5 लाख करोड़ के ज्वेलरी मार्केट की तस्वीर, नेशनल गोल्ड बोर्ड बनाने का सुझाव

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नई दिल्ली: देश का युवा वर्ग, जिसे वर्तमान समय में ‘Gen Z’ (जनरेशन जी) के नाम से संबोधित किया जाता है, अब देश के आर्थिक परिदृश्य को बदलने जा रहा है। शेयर बाजार में करीब 40 फीसदी की दमदार हिस्सेदारी दर्ज कराने के उपरांत अब इस युवा पीढ़ी का ध्यान देश के विशाल गोल्ड मार्केट पर केंद्रित हो गया है। पारंपरिक रूप से भारत में सोना खरीदना विवाह, त्यौहारों और बुजुर्गों की बचत तक सीमित था, परंतु नई पीढ़ी का डिजिटल-फर्स्ट दृष्टिकोण और बदलती जीवनशैली भारत के ₹315 लाख करोड़ के विशाल गोल्ड इकोसिस्टम में खपत एवं निवेश की नई क्रांति लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

📱 ज्वेलरी दुकानों से नहीं बल्कि स्मार्टफोन से शुरू होगी सोने की अगली लहर, खुल सकता है 315 लाख करोड़ का मार्केट

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ओर से जारी ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने के निवेश की अगली बड़ी लहर पारंपरिक दुकानों के बजाय स्मार्टफोन्स से संचालित होगी।

डिजिटल रूप से जागरूक ‘Gen Z’ (1997 से 2012 के मध्य जन्मे लोग) के सबसे तेजी से उभरते कंज्यूमर ग्रुप बनने के साथ ही देश के पास अपने गोल्ड इकोसिस्टम को आधुनिक बनाने का ऐतिहासिक अवसर है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2035 तक यह युवा वर्ग कंज्यूमर खर्च में लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देगा, जो सोने को केवल पुश्तैनी गहनों के स्थान पर एक फ्लेक्सिबल फाइनेंशियल एसेट (आर्थिक संपत्ति) के रूप में देखता है।

🏠 भारतीय परिवारों के पास जमा है 31,000 टन सोना, डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी से बदलेगा मॉडल

रिपोर्ट का अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास 31,000 टन से अधिक सोना जमा है, जिसकी अनुमानित आर्थिक कीमत लगभग 314.9 लाख करोड़ रुपये ($3.4 ट्रिलियन) है।

यह देश की सबसे बड़ी परंतु कम उपयोग में लाई गई एसेट है। यदि इस घरेलू सोने का एक छोटा सा अंश भी आधुनिक वित्तीय प्रणाली में उपयोग में लाया जाता है, तो इससे देश के फाइनेंशियल मार्केट मजबूत होंगे, लिक्विडिटी में वृद्धि होगी और बुलियन आयात (Imported Bullion) पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके लिए कंजम्पशन-बेस्ड मॉडल को बदलकर टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के एकीकृत मॉडल में परिवर्तित करने की आवश्यकता है।

💎 4.5 लाख करोड़ का ज्वेलरी मार्केट अहम मोड़ पर, ओमनीचैनल रिटेल और डिजाइन इनोवेशन पर जोर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, भारत का गोल्ड ज्वेलरी मार्केट (जिसका मूल्य वर्ष 2025 में लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये होगा) एक महत्वपूर्ण बदलाव के मोड़ पर खड़ा है।

यद्यपि पारंपरिक भरोसा अब भी महत्वपूर्ण है, परंतु डिजिटल तकनीक, संगठित रिटेल (Organized Retail) और अनिवार्य हॉलमार्किंग मांग को नया स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। युवा खरीदारों को आकर्षित करने के लिए अब ज्वेलर्स को कस्टमाइजेशन, यूनिक डिजाइन इनोवेशन और ओमनीचैनल रिटेल अनुभव पर विशेष ध्यान केंद्रित करना होगा।

⚓ आयात पर घटेगी निर्भरता, ‘नेशनल गोल्ड बोर्ड’ और ‘गोल्ड इनोवेशन सेंटर’ बनाने की सिफारिश

भारत के गोल्ड इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने हेतु वित्तीयकरण (Financialization), घरेलू माइनिंग को बढ़ावा देने, ज्वेलरी एक्सपोर्ट बढ़ाने और सोने को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में मान्यता देने की सिफारिश की गई है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (भारत) के रीजनल CEO सचिन जैन ने बताया कि रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों के केंद्र में ‘नेशनल गोल्ड बोर्ड’ (National Gold Board) का गठन है, जो गोल्ड वैल्यू चेन में नीतिगत समन्वय हेतु शीर्ष संस्था के रूप में कार्य करेगा। इसके साथ ही रिसर्च, डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए ‘गोल्ड इनोवेशन सेंटर’ स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है।

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