Rice Scam Update: छत्तीसगढ़ सदन में गूंजा ‘मुसुआ’ धान घोटाला, कांग्रेस का वॉकआउट; जानें क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल?
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में धान खरीदी समितियों में चूहों द्वारा धान खाने के मामले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा विपक्ष ने किया. विपक्ष ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की. विपक्ष ने आरोप लगाया कि कुप्रबंधन के कारण प्रदेश को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है. वहीं, आसंदी ने स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद नाराज विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह तक पहुंच गए और खुद ही निलंबित हो गए.
“मुसुआ के नाम पर हुआ बड़ा भ्रष्टाचार”: विपक्ष
सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने धान खरीदी समितियों में चूहों द्वारा धान खाने का मुद्दा उठाते हुए कहा, सरकार के कुप्रबंधन के कारण करीब 4600 करोड़ का नुकसान हुआ है. चरणदास महंत ने कहा कि धान की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह विफल रही है.
भूपेश बघेल ने सरकार की नीति पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन से कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल ने भी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, धान की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी थी, लेकिन गलत नीतियों और लापरवाही के कारण भारी नुकसान हुआ है. बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है.
“मुसुआ को मिले न्याय”: विपक्ष
हंगामे के बीच विपक्ष के कुछ विधायक “मुसुआ को न्याय दो” के नारे लगाते नजर आए. उनका कहना था कि प्रदेश में मुसुआ यानी चूहों के नाम पर धान के नुकसान का हवाला देकर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया है. उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
स्थगन प्रस्ताव खारिज, गर्भगृह में पहुंचे विधायक
आसंदी की ओर से स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद विपक्षी सदस्य आक्रोशित हो गए. उन्होंने सदन में जोरदार नारेबाजी की और विरोध जताते हुए गर्भगृह में पहुंच गए, जिसके चलते वे खुद-ब-खुद निलंबित हो गए.
सदन के बाहर भी जारी रहा विरोध
सदन से बाहर निकलने के बाद कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में भी प्रदर्शन किया. उन्होंने “मुसुआ के नाम पर भ्रष्टाचार बंद करो” के नारे लगाते हुए सरकार पर धान घोटाले का आरोप लगाया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.