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कहीं नथुली तो कहीं शांख पोला: भारत के अलग-अलग राज्यों में दुल्हन के लिए क्यों जरूरी हैं ये खास गहने?

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भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव होती है. यहां हर राज्य, हर समुदाय और हर परिवार की अपनी अलग परंपरा है, जो शादी के हर रस्म में साफ झलकती है. खासतौर पर दुल्हन का श्रृंगार तो भारतीय विवाह का सबसे आकर्षक और भावनात्मक हिस्सा माना जाता है. लाल जोड़े के साथ पहने जाने वाले पारंपरिक आभूषण न सिर्फ उसकी सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि उसके वैवाहिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक भी होते हैं. भारत के अलग-अलग राज्यों में दुल्हन को कुछ खास ज्वेलरी जरूर पहनाई जाती है, जिनका अपना धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व होता है.

कहीं नथुली को सुहाग की निशानी माना जाता है, तो कहीं शांख पोला को वैवाहिक जीवन की लंबी उम्र और खुशहाली का प्रतीक समझा जाता है. उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, पूर्व से पश्चिम तक, हर क्षेत्र में दुल्हन के आभूषणों का अंदाज बदल जाता है. चलिए इस आर्टिकल में आपको भी बताते हैं कि भारत के अलग-अलग राज्यों में दुल्हन को कौन से जेवर जरूर पहनाए जाते हैं और इनका क्या महत्व है.

उत्तराखंड दुल्हनों की शान

उत्तराखंड की दुल्हन सादगी की मिसाल होती हैं. लाइटमेकअप और साड़ी में वो काफी सुंदर लगती हैं. लेकिन पहाड़ी दुल्हन का श्रृ्ंगार नथुली के बिना अधूरा माना जाता है. नाक में पहनी जानी वाली बड़ी सी नथ को नथुली कहा जाता है. कहते हैं कि ये सुहाग और समृद्धि का प्रतीक है. इसे शादी के दिन खास तौर पर दुल्हन को पहनाया जाता है. सिर्फ शादी के दिन ही नहीं शादी के बाद भी तीज-त्योहार और हर शुभ मौके पर सुहागन महिलाएं नथुली पहनती है.

पश्चिम बंगाल का शांख पोला

पश्चिम बंगाल की दुल्हन भी बेहद खूबसूरत लगती हैं. उनकी सफेद और लाल साड़ी, सिर पर पहना मुकुट और पान के पत्तों से चेहरा छिपाना…शादी की ये परंपरा काफी अलग होती हैं. बंगाली में दुल्हन को शांक पोला पहनाना शुभ माना जाता है. सफेद और लाल कलर की चूड़िया होती हैं. इन्हें वैवाहिक जीवन की खुशहाली और लंबी उम्र का प्रतीक माना जाता है. शादी के बाद भी महिलाएं इन्हें नियमित रूप से पहनती हैं.

तमिलनाडु में ओडियानम है जरूरी

तमिलनाडु में दुल्हन को ओडियानम जरूर पहनाना जाता है. जिसे कमरबंध भी कहा जाता है. दक्षिण भारत की दुल्हन सोने का कमरबंध पहनती है. इसे समृद्धि और स्त्री शक्ति का प्रतीक माना जाता है और यह पारंपरिक साड़ी के साथ बेहद सुंदर लगता है.

कश्मीर की दुल्हन को खास जेवर देज्होर

कश्मीर की संस्कृति और परंपराएं भी बेहद खास हैं. कश्मीरी पंडित दुल्हनों के लिए देज्होर बेहद खास आभूषण होता है. ये कान में पहना जाने वाला लंबा लटकने वाला इयररिग्स जैसा गहना होता है. जिसे शादी के समय दुल्हन को पहनाया जाता है. इसे वैवाहिक बंधन और नई जिम्मेदारियों का प्रतीक माना जाता है. शादी के बाद भी महिलाएं इसे खास मौकों पर जरूर पहनती हैं.

पंजाबी दुल्हन का लाल चूड़ा

पंजाबी दुल्हन को चूड़ा काफी मशहूर है. अब सिर्फ इसे पंजाबी दुल्हन ही नहीं बल्कि हर एक दुल्हन पहनना पसंद करती है. लेकिन पंजाब में इसकी एक अलग परंपरा है. वहां मामा द्वारा होने वाली दुल्हन को चूड़ा पहनाया जाता है, जिसे शादी के 40 दिन बाद ही उतारा जाता है. सफेद और लाल रंग के इस चूड़े को नई जिदंगी की शुरुआत और सौभाग्य का संकेत माना जाता है.

राजस्थान का बोरला मांगटीका

राजस्थान की दुल्हन में एक अलग ही शादी अंदाज नजर आता है. शादी के मौके पर दुल्हन को बोरला जरूर पहनाया जाता है, जो गोल आकार का एक मांग टीका जैसा होता है. ये मांग टीका शाही परंपरा और राजपुताना संस्कृति की झलक को दिखाता है.

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