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Vidisha Holi Tradition: विदिशा में 100 साल पुरानी रावजी की होली, माचिस से नहीं बंदूक की गोली से होता है होलिका दहन

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विदिशा: सिरोंज क्षेत्र में इस वर्ष भी वह ऐतिहासिक और अनोखी परंपरा निभाई जाने जा रही है, जिसमें होलिका दहन बर्तल बंदूक की गोली से निकली चिंगारी से किया जाता है. सौ वर्षों से अधिक पुरानी यह परंपरा स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. आज भी यह परंपरा माथुर परिवार द्वारा पूरी श्रद्धा और सुरक्षा व्यवस्था के साथ निभाई जाती है.

कैसे शुरू हुई गोली से होलिका दहन की परंपरा
यह परंपरा होलकर रियासत के समय आरंभ हुई. उस काल में ‘रावजी की होली’ के नाम से प्रसिद्ध यह आयोजन शौर्य, आस्था और उत्साह का प्रतीक माना जाता था. होलिका के लिए सूखी घास, लकड़ी और रुई का ढेर बनाकर उसमें बंदूक की गोली दागी जाती थी, जिससे निकली चिंगारी ही होलिका को प्रज्वलित करती थी. बाद में सिरोंज पर नवाबी शासन आया, जिसके दौरान इस अनोखी रस्म पर रोक लगाने का प्रयास किया गया. लेकिन परंपरा निभाने वाले माथुर परिवार के पूर्वजों ने विरोध के रूप में घास के ढेर पर गोली चलाकर आग लगा दी. उसके बाद से यह परंपरा और भी मजबूत हो गई और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है.

2026 में भी निभेगी परंपरा, प्रशासन ने की पूरी सुरक्षा व्यवस्था
इस वर्ष भी होलिका दहन का यह अनोखा आयोजन पचकुइया क्षेत्र स्थित ‘होलिका चबूतरा’ पर किया जाएगा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, प्रभारी अधिकारी और पुलिस बल मौजूद रहेगा. इस संबंध में सिरोंज के एस.डी.एम. हरिशंकर विश्वकर्मा ने बताया, ”इस विशेष होलिका दहन के संबंध में समीक्षा की गई है. माथुर परिवार द्वारा परंपरागत रूप से इस आयोजन को किया जाता है और बंदूक की गोली से होलिका दहन होता है.

हम हर बार की तरह इस बार भी पुलिस बल और सुरक्षा प्रबंध उपलब्ध करा रहे हैं. यह आयोजन वर्षों से परंपरा के रूप में चला आ रहा है और उसी प्रकार इस बार भी होगा. होलिका दहन का स्थल ‘होलिका चबूतरा’ है, जहां शहर के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहते हैं. परंपरा महत्वपूर्ण है, इसलिए हम संस्कृति का सम्मान करते हुए सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हैं.”

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पूरी निगरानी में संपन्न होता है कार्यक्रम
एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि ”अब तक कोई विशेष अनुमति के लिए आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. यह आयोजन परंपरागत रूप से होता आया है और पूरी निगरानी में ही संपन्न होगा. इस ऐतिहासिक परंपरा को आज भी सिरोंज का माथुर परिवार निभा रहा है.” परिवार के सदस्य, महेश माथुर ने बताया ”सिरोंज में बंदूक की गोली से होलिका दहन करने की परंपरा हमारे पूर्वजों ने शुरू की थी. नवाबी दौर में इस पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी, पर हमारे बुजुर्गों ने घास के गंज को जमा करके बंदूक की गोली चलाकर आग लगाई. तभी से यह परंपरा निरंतर चल रही है.”

उन्होंने यह भी बताया ”माथुर परिवार के गुरुजी लल्लीकांत शर्मा होलिका पूजन और शुरुआत करवाते हैं. वर्तमान में सिरोंज के विधायक उमाकांत शर्मा हमारे गुरु भी हैं और परंपरा के ज्ञाता भी. उनके सहयोग से ही यह आयोजन व्यवस्थित रूप से संपन्न होता है. हम इस प्रथा को सम्मान के साथ आगे बढ़ा रहे हैं.”

माथुर परिवार के गुरुजी लल्लीकांत शर्मा ने बताया “अनेकों वर्षों से सिरोंज की यह होली ‘बड़ी होली’ कहलाती है, जिसका दहन बंदूक की गोली से किया जाता है. उसी अग्नि को लेकर लोग घर-घर होली प्रज्वलित करते हैं. माथुर परिवार इस होलिका की पूजा और दहन करते हैं. यह परंपरा राजघराने की होली मानी जाती है, इसलिए इसे बंदूक से अग्नि प्रज्वलित करने की परंपरा रही है.”

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