भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के 10वें दिन कांग्रेस विधायक ने विरोध का ऐसा तरीका आजमाया, जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबूलाल जंडेल ने अपने खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर के खिलाफ विधानसभा परिसर में अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया. कांग्रेस विधायक ने विधानसभा परिसर में शीर्षासन किया. उन्होंने शीर्षासन करते हुए ही मीडिया के सामने अपनी बात को रखा. वहीं विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित हो गई है.
कांग्रेस विधायक ने इसलिए किया शीर्षासन
दरअसल, महाशिवरात्रि के मौके पर श्योपुर में शिव बारात निकाली गई थी. शिव बारात का एक वीडियो सर्कुलेट हुआ, इसमें कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल हर्ष फायर करते दिखाई दे रहे थे. वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने कांग्रेस विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली. कांग्रेस विधायक ने खुद पर हुई एफआईआर को राजनीति से प्रेरित बताया. कांग्रेस विधायक ने कहा कि उनके खिलाफ सरकार द्वारा द्वेषपूर्ण तरीके से कार्रवाई की जा रही है.विपक्षी पार्टी का विधायक होने की वजह से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है. कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में उनके खिलाफ पिछले एक माह में 3 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. जबकी कुल मिलाकर उनके खिलाफ अब तक 15 एफआईआर की जा चुकी है. उन्होंने कहा कि जब भी वे किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दे पर आवाज उठाते हैं, उन पर एक नई एफआईआर दर्ज करा दी जाती है. शिव बारात में बीजेपी नेता जब फायरिंग करते हैं, तो उन पर कार्रवाई नहीं होती, लेकिन जब वे पटाखा भी फोड़ते हैं, तो मामला दर्ज कर लिया जाता है.
कांग्रेस ने किया वॉकआउट
उधर कांग्रेस विधायक ने यह मुद्दा सदन में भी उठाया. कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष जानबूझकर विपक्षी विधायकों को निशाना बना रही है. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट भी किया. उधर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि “विधायक ने अपनी बात रखी है, मामले की जांच की जाएगी.”
विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थिगित
मध्य प्रदेश की विधानसभा की कार्यवाही दो दिन पहले अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गई. संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा में कार्यमंत्रणा समिति में विपक्ष के साथ तय हुआ था कि प्रमुख विषयों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए, बाकी विषयों पर चर्चा भले ही न हो. मुझे लगता है कि अब बहुत ज्यादा सदन में काम नहीं बचा था. अधिकांश विधायकों का कहना था कि उनके क्षेत्र में होली 15 दिनों तक चलती है और इसलिए होली के त्योहार के बाद जल्दी वापस लौटना संभव नहीं होगा. सभी चाहते थे कि सदन की कार्यवाही शुक्रवार को संपन्न हो जानी चाहिए.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.