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Justice For Tillu: मासूम टिल्लू केस: 100 DNA टेस्ट के बाद अब NHAI और मौसम विभाग से मांगी गई मदद, क्या मिलेगा न्याय?

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Dausa Prince Murder Case: यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती. एक मासूम बच्चे के किडनैपिंग और मर्डर का ऐसा रहस्य, जिसे सुलझाने में पुलिस को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है. पुलिस ने एक्सप्रेसवे अथॉरिटी और मौसम विभाग की भी मदद ली है. हालांकि, कातिलों की पहचान तो छह साल बाद हो गई, लेकिन बच्चे के शव का राज आज भी एक्सप्रेसवे के कंकर-पत्थरों के नीचे दफ्न है. यह कहानी राजस्थान के दौसा की है, जिसकी परतें खुलती हैं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

चार साल का टिल्लू उर्फ प्रिंस 2020 में अपने घर के आंगन से अचानक लापता हो गया था. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह गुमशुदगी एक ऐसे अपराध का रूप ले लेगी, जो सालों तक अनसुलझा रहेगा. पुलिस ने बच्चे की तलाश में हर संभव कोशिश की. गांव, शहर, रिश्तेदार सब जगह तलाश हुई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला. समय बीतता गया, परिजनों की उम्मीद टूटती गई और मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जाता दिखा.

100 से अधिक लोगों की डीएनए जांच

बांदीकुई थाना प्रभारी जहीर अब्बास के अनुसार, वर्ष 2020 में प्रिंस के अचानक लापता होने के बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी रही. जांच के दौरान देशभर के लापता बच्चों का डेटा खंगाला गया और 100 से अधिक लोगों की डीएनए जांच कराए गए, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला. समय बीतने के साथ पुलिस का शक परिवार और उनके रिश्तेदारों पर होने लगा. जांच और तकनीकी सबूतों के आधार पर शक की सुई बच्चे के चाचा अनिल और बुआ कृष्णा की ओर घूमी. सख्ती से पूछताछ में दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया.

चाचा और बुआ ही निकले कातिल

पुलिस के मुताबिक, चाचा अनिल और बुआ कृष्णा ने क्राइम तो कबूल लिया, लेकिन उन्होंने जहां बच्चे को दफनाया था, उस जगह की पहचान करना काफी मुश्किल हो रहा था. ऐसा इसलिए, क्योंकि वारदात के समय एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन था, लेकिन 6 साल बाद ये बन चुका है. ऐसे में पुलिस ने हाईवे अथॉरिटी की मदद ली. एक्सप्रेसवे के 6 साल पहले के एरियल सर्वे का वीडियो देखा गया. पुलिस ने पुराने भू-भाग और वर्तमान स्थिति (एक्सप्रेसवे) का विश्लेषण किया, जिससे उस इलाके की पहचान हो सकी, जहां पर बच्चे को दफनाया गया.

इसी आधार पर प्रशासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की निगरानी में एक्सप्रेस के किनारे खुदाई अभियान चलाया. 24 और 25 फरवरी को एक्सप्रेस-वे किनारे चिन्हित पांच जगहों पर जेसीबी से घंटों खुदाई की गई. हालांकि, अभी तक बच्चे का कंकाल बरामद नहीं हो सका है. अब पुलिस एक्सप्रेसवे की संभावित जगह पर खुदाई करने की तैयारी में है, इसके लिए एनएचआई को पत्र लिखा गया है.

मौसम विभाग की भी ली थी मदद

पुलिस ने जांच को और सटीक बनाने के लिए मौसम विभाग से भी सहायता ली. 16 अगस्त 2020 को बच्चे की हत्या की गई थी. उस दौरान मौसम विभाग के अनुसार इलाके में खूब बारिश हुई थी. बारिश से मिट्टी के कटाव और भू-स्तर में आए बदलावों का साइंटिफिक विश्लेषण किया गया, जिससे ये पता लगाया जा सके कि वर्तमान में वो जगह कहा है, जहां पर बच्चे को दफनाया गया था.

16 अगस्त 2020 को बच्चा लापता हुआ

16 अगस्त 2020 को प्रिंस अपने घर के आंगन से अचानक लापता हो गया था. परिवार और गांववालों ने काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. गुमशुदगी का मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की, परंतु समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ गया. बच्चे के माता-पिता ने हार नहीं मानी और 2021 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दोबारा जांच की मांग की. कोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस ने मामले की फिर से जांच शुरू की है.

परिजनों का आरोप है कि पारिवारिक विवाद और आपसी रंजिश के चलते ही मासूम की हत्या की गई. बताया जाता है कि बच्चे के लापता होने के बाद आरोपी रिश्तेदार भी परिवार के साथ खोज अभियान में शामिल होते रहे और शोक जताने का दिखावा करते रहे, ताकि किसी को उन पर संदेह न हो. वर्तमान में पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है.

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