बुढलाडा : केला, आम, पपीता खाने वाले सावधान हो जाएं, क्योंकि फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल हो रहा है। कुछ फल विक्रेता और थोक व्यापारी तेजी से मुनाफा कमाने के लिए एफ.एस.एस.ए.आई. द्वारा प्रतिबंधित रसायन ‘कैल्शियम कार्बाइड’ का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं, जो नमी के संपर्क में आने पर ऐसी गैस छोड़ता है, जो फलों को जल्दी पीला कर देती है।
ऐसे केले, पपीते और आम जैसे फल बाहर से भले ही पके दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर से अक्सर कच्चे रह जाते हैं और उनकी पोषण गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। कैल्शियम कार्बाइड से पके केलों में आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे जहरीले तत्व हो सकते हैं। ऐसे फलों का लगातार सेवन करने से सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, पेट दर्द और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसे फलों का उपयोग पाचन तंत्र और श्वसन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह बहुत खतरनाक है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और केवल एथिलीन गैस के उपयोग को ही मंजूरी दी गई है। इस मामले में एडवोकेट जतिंदर गोयल, एडवोकेट भूपेश बांसल, एडवोकेट सुनील गर्ग, एडवोकेट जैनी काठ और एडवोकेट सुरजीत सोढी ने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की व कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने पंजाब सरकार और संबंधित विभाग को मंडियों में नियमित जांच और सैंपल लेने की सलाह दी।
इस तरह करें कैमिकल वाले केले की पहचान
सिविल अस्पताल के एम.डी. डाॅ. सुमित ने बताया कि प्राकृतिक तरीके से पके केलों पर हल्के भूरे या काले धब्बे होते हैं और रंग थोड़ा असमान होता है, जबकि रसायनों से पके केले बहुत चमकीले पीले और एकसमान दिखते हैं। उन्होंने कहा कि फल खरीदते समय भरोसेमंद दुकानों को प्राथमिकता देनी चाहिए और फलों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.