Deoghar News: बदहाली के आंसू रो रही देवघर बाजार समिति, पीने के पानी तक की सुविधा नहीं, किसान-मजदूर परेशान
देवघर: जिले के बैजनाथपुर चौक पर कृषि उत्पाद बाजार समिति, जहां किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलना चाहिए, वह आज खुद बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है. जिले की सबसे अहम मंडी मानी जाने वाली बाजार समिति की हालत ऐसी है कि व्यापार तो हो रहा है, लेकिन व्यवस्था दम तोड़ती नजर आती है.
मंडी परिसर में काम करने वाले व्यापारियों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं की बहुत कमी है. ट्रांसपोर्टरों के लिए समुचित सड़कें नहीं हैं, दुकानदारों को टूटी-फूटी दुकानों में काम करना पड़ता है और मजदूरों को पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है.
अनाज की बोरियां ढोकर गुजारा करने वाले मजदूर अंग्रेज तांती बताते हैं कि दिन भर की मेहनत के बाद जब उन्हें हाथ-पैर धोने की जरूरत होती है, तो उन्हें मंडी परिसर के बाहर जाना पड़ता है क्योंकि अंदर पानी की कोई सुविधा नहीं है.
अधिकारियों का तर्क है कि बाजार समिति की आय सीमित है. यहां की करीब 180 दुकानों से हर महीने 10 से 12 लाख रुपये किराया आता है, जिसमें पूरे परिसर की सफाई, पीने का पानी, लाइटिंग और मेंटेनेंस का खर्च शामिल है. बड़े विकास कार्यों में रुकावट आ रही है क्योंकि सारा पैसा छोटे-मोटे खर्चों में खर्च हो जाता है.
हालांकि, व्यापारियों का दावा है कि खराब हालत के बावजूद सरकार को सालाना 1 से 1.5 करोड़ रुपये का प्रॉफिट होता है. उनका कहना है कि अगर मार्केट को ठीक से जीर्णोद्धार किया जाए तो किसान बड़ी संख्या में यहां अपनी उपज लाएंगे, जिससे व्यापार बढ़ेगा और राजस्व में भी इजाफा होगा.
बाजार समिति में व्यापारियों को हो रही दिक्कतों के बारे में संथाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण कहते हैं कि बाजार समिति की हालत बहुत चिंताजनक है. यहां पानी, बिजली और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. संथाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मांग की है कि बाजार समिति की तस्वीर बदलने पर ही इसकी आर्थिक हालत सुधरेगी.
मंडी की हालत के बारे में जब सचिव राहुल कुमार से संपर्क किया गया तो वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे और कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई. वहीं, राज्य कृषि विपणन समिति के अध्यक्ष रवींद्र सिंह ने कहा कि बाजार समिति के विकास के लिए नया एक्ट लागू किया गया है. इसकी नियमावली प्रक्रिया में हैं. समिति की ओर से बाजार समिति को आधुनिक और व्यवस्थित करने के लिए काम किया जा रहा है, ताकि किसानों और व्यापारियों के बीच बेहतर तालमेल बन सके और मंडी के जरिए ज्यादा से ज्यादा व्यापार हो सके.
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