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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: सीवरेज और एसटीपी सिस्टम में बदलाव, ठेकेदारों को मिली संचालन और रखरखाव की बड़ी जिम्मेदारी

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चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने सीवरेज सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े टेंडरों की शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। अब इनके निर्माण के साथ-साथ लंबी अवधि तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी ठेकेदारों की होगी।

नई व्यवस्था के तहत परियोजनाओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें 40 एमएलडी तक के एसटीपी, 40 एमएलडी से बड़े एसटीपी और बिना ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) श्रेणी वाले एसटीपी शामिल हैं। हरियाणा सरकार ने नये नियमों में हर श्रेणी के लिए अलग लागत बंटवारा, डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (DLP), आपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) अवधि तथा सुरक्षा राशि व परफार्मेंस बैंक गारंटी (PBG) की स्पष्ट शर्तें तय कर दी हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम प्लांटों की दीर्घकालिक कार्यक्षमता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

40 एमएलडी तक की क्षमता वाले एसटीपी के लिए कुल परियोजना लागत का 80 प्रतिशत हिस्सा निर्माण (कैपिटल वर्क) और 20 प्रतिशत आपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए निर्धारित किया गया है। 80 प्रतिशत कैपिटल कास्ट में से 40 प्रतिशत पैसा सिविल वर्क और 40 प्रतिशत मैकेनिकल वर्क पर खर्च होगा। 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल व इंस्ट्रूमेंटेशन पर खर्च किया जाएगा।

बिना आपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) श्रेणी वाले एसटीपी की श्रेणी में संबंधित एजेंसी या ठेकेदार को केवल सीवरेज नेटवर्क का निर्माण करना है। इसमें आपरेशन एंड मेंटेनेंस शामिल नहीं है। यानी तीन साल का डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड तय किया गया है। इसके तहत सिक्योरिटी राशि तीन चरणों में वापस दी जाएगी। पहले साल के बाद 30 प्रतिशत, दूसरे साल के बाद 30 और फिर तीसरे साल के बाद 40 प्रतिशत सिक्योरिटी राशि वापस मिलेगी। परफार्मेंस बैंक गारंटी (पीबीजी) का पांच प्रतिशत पैसा तीन साल पूरे होने के 45 दिन बाद जारी होगी।

हरियाणा सरकार का तर्क है कि पहले कई परियोजनाओं में निर्माण तो हो जाता था, लेकिन रखरखाव में ढिलाई से प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पाते थे। इससे सीवरेज ओवरफ्लो, प्रदूषण और सार्वजनिक शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। नई व्यवस्था में भुगतान का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक रोके जाने से ठेकेदार गुणवत्ता और संचालन पर ध्यान देने को मजबूर होंगे। हरियाणा सरकार ने 55 से अधिक विभागों के प्रशासनिक सचिवों को इस संदर्भ में पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि भविष्य के सभी संबंधित टेंडरों में इन संशोधित शर्तों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

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