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Bhopal Hospital Fraud: भोपाल के सरकारी अस्पताल में मौत का डर दिखाकर ठगी, मरीजों के परिजनों से ‘इलाज’ के नाम पर वसूली

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भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में इलाज के लिए आए गरीब और मजबूर परिवारों की पीड़ा को हथियार बनाकर एक शातिर ठग ने ऐसा खेल खेला, जिसने सबको हिला कर रख दिया. खुद को डॉक्टर बताने वाला यह जालसाज अस्पताल के वार्डों में बेखौफ घूमता रहा और मरीजों के परिजनों को मौत का डर दिखाकर उनसे ऑनलाइन पैसे ऐंठता रहा.

आरोप है कि यह ठगी अकेले किसी एक व्यक्ति की नहीं थी, बल्कि इसके पीछे अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी थी, जो मरीजों की गोपनीय जानकारी उसे उपलब्ध कराते थे.

QR कोड से वसूलता था रकम

पुलिस जांच में सामने आया है कि जितेंद्र खाकरे नाम का आरोपी मरीजों के परिजनों को फोन कर खुद को अस्पताल का डॉक्टर बताता था. वह कहता था कि मरीज की हालत गंभीर है, तुरंत दवाइयों या ऑपरेशन के लिए पैसे भेजना जरूरी है. घबराए हुए परिजन भरोसे में आकर उसके भेजे गए QR कोड पर तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते थे. रकम मिलते ही आरोपी फोन बंद कर देता या नंबर ब्लॉक कर देता था.

अस्पताल के कर्मचारी देते थे जानकारी

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी को मरीज का नाम, बीमारी, वार्ड नंबर, ऑपरेशन की तारीख और परिजनों के मोबाइल नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी अस्पताल के ही कुछ कर्मचारी उपलब्ध कराते थे. इसके बदले उन्हें हर ठगी की रकम का करीब 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था. अब तक कम से कम 7 कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है.

पीड़ितों ने पुलिस को बताई आपबीती

एक पीड़ित विनोद अहिरवार ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती थी. एक कॉल आया, कॉलर ने खुद को डॉक्टर बताते हुए कहा कि लिवर में सूजन है और बाहर से दवा मंगानी होगी. 5 हजार रुपए QR कोड पर भेजने के बाद उनका नंबर ब्लॉक कर दिया गया. वहीं, नितिश विश्वकर्मा को कॉल कर कहा गया कि उनकी गर्भवती पत्नी और नवजात की हालत नाजुक है. डर के कारण उन्होंने दो बार में करीब 11 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए.

कैसे आरोपी तक पहुंची पुलिस?

लगातार शिकायतों के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने पुलिस को सूचना दी और एक विशेष रणनीति बनाई गई. पीड़ित के जरिए आरोपी से दोबारा संपर्क कराया गया. जैसे ही आरोपी ने कॉल किया, साइबर टीम ने नंबर ट्रेस कर लिया. तीन दिन की निगरानी के बाद आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया.

45 दिनों में 10 से ज्यादा परिवार शिकार

पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले डेढ़ महीने में इसी तरीके से 10 से ज्यादा मरीजों के परिजनों को ठग चुका है. हर परिवार से 7 से 10 हजार रुपए की वसूली की गई. फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं.

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