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44 साल बाद मिला इंसाफ: 100 साल की उम्र में मर्डर केस से बरी हुआ बुजुर्ग, इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला

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एक हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए शख्स को जिंदगी के 100 वसंत देखने के बाद जाकर अब कोर्ट से इंसाफ मिल सका. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कल बुधवार को मर्डर केस के करीब 100 साल के आरोपी को बरी कर दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उसकी ओर से उम्रकैद की सजा को चुनौती दिए हुए चार दशक से ज्यादा का वक्त हो चुका है और उसे राहत देते समय उसके द्वारा झेले गए सामाजिक नतीजों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस संजीव कुमार की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि अपील का लंबे समय तक लंबित रहना और आरोपी धनी राम की लंबी उम्र को देखते हुए राहत देना प्रासंगिक है.

1984 में सुनाई गई थी उम्र कैद की सजा

मामला उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले का है. साल 1982 में यह हत्या जमीन से जुड़े एक विवाद को लेकर हुई थी, और इस मामले में 3 लोग मैकू, सत्ती दीन और धनी राम आरोपी बनाए गए. हत्याकांड के बाद मैकू फरार हो गया था, जबकि हमीरपुर सेशंस कोर्ट ने 2 साल बाद 1984 में सत्ती दीन और धनी राम को उम्रकैद की सजा सुना दी थी.

धनी राम को उसी साल जमानत पर रिहा कर दिया गया था. जबकि सत्ती दीन की अपील लंबित रहने के दौरान मौत हो गई, ऐसे में राम इस केस में एकमात्र जीवित अपीलकर्ता रह गया.

अभियोजन पक्ष शक साबित नहीं कर सकाः HC

यह देखते हुए कि राम तब से जमानत पर है, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि उसकी जमानत बॉन्ड को खत्म कर दिया जाए और यह भी कहा कि आरोपी को बरी करने का फैसला मामले की खूबियों पर आधारित है, खासकर अभियोजन पक्ष के आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में नाकामी को देखते हुए.

फैसला सुनाते समय डिवीजन बेंच ने आगे यह भी कहा कि दशकों से आरोपी द्वारा झेली गई चिंता, अनिश्चितता और सामाजिक नतीजों को आकलन करते समय इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि अब इस केस में न्याय क्या मांगता है.

धनी राम के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि अपीलकर्ता की उम्र करीब 100 साल है और उसने केवल मैकू को पीड़ित पर गोली चलाने के लिए उकसाया था.

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