Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

कैलाश विजयवर्गीय का तीखा वार: ‘पिता PWD मंत्री और बच्चों को कपड़े दिला रहा ठेकेदार’, जानें किसके लिए कहा?

23

इंदौर: अपने तरह-तरह के बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने देश की शिक्षा नीति पर सवाल खड़े किए हैं. साथ ही बच्चों को चरित्रवान बनाने पर जोर दिया है. मंत्री विजयवर्गीय ने कहा आज के दौर में पिता यदि पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर है और उसके बच्चों को कपड़े दिलाने ठेकेदार लेकर जाएगा, तो फिर चरित्र की बात करना बेमानी है.

‘उच्च शिक्षा से तो गुरुकुल की शिक्षा ज्यादा अच्छी’

इंदौर के वैष्णव विश्वविद्यालय में आयोजित ज्ञान सभा के में शामिल होने कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे थे. जहां शिक्षा के विषय पर बात करते हुए मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा से तो गुरुकुल की शिक्षा ज्यादा अच्छी थी, क्योंकि वहां सभी बच्चों को एक जैसी शिक्षा दी जाती थी. गुरुकुल में बच्चों का चरित्र निर्माण होता था, लेकिन आज के समय में बच्चा 4 घंटे स्कूल में रहता है, जबकि 20 घंटे घर पर रहता है.

‘स्कूल एजुकेशन में संभव है बच्चों का चरित्र निर्माण’

घर पर यदि उसके माता-पिता बच्चों के सामने ही शराब पार्टी करें तो फिर स्कूल के 4 घंटे का कोई मतलब नहीं रह जाता. इसलिए बच्चों के स्कूली सिलेबस के साथ अब पेरेंट्स के लिए भी सिलेबस होना चाहिए. जिसमें उन्हें नसीहत दी जा सके कि बच्चों के साथ घर में उनका व्यवहार कैसा हो. उन्होंने देश की शिक्षा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा बच्चों में चरित्र निर्माण स्कूल एजुकेशन के दौरान ही संभव है, क्योंकि कॉलेज में तो बच्चा काफी कुछ जानने समझने लगता है, इसलिए शिक्षा नीति कैसी भी बना दो, उसका कोई मतलब नहीं.

कैलाश विजयवर्गीय का शिक्षा नीति पर सवाल

यदि पिता पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर हो और सड़क बनाने वाला ठेकेदार मंत्री के बच्चे को कपड़े दिलाने ले जाए, तो फिर चरित्र कहां से आएगा. उन्होंने कहा आज के दौर में कोई भी संगठन या संस्थान ऐसा नहीं है, जहां बच्चों का चरित्र निर्माण किया जा रहा हो. कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा नीति में बदलाव करने से अच्छा है कि परिवार में बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, जो आज के दौर में किसी भी शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा की तुलना में सबसे ज्यादा जरूरी है. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मनमोहन वैद्य, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ अतुल कोठारी सहित कई लोग मौजूद रहे.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.