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Sajjan Kumar Acquitted: सज्जन कुमार को मिली राहत तो छलका पीड़ितों का दर्द, बोले- ‘न्याय के लिए अब ऊपरी अदालत जाएंगे

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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार (22 जनवरी) को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों में बरी कर दिया. यह मामला राजधानी के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हिंसा भड़काने के आरोपों से जुड़ा था. स्पेशल जज डिग विनय सिंह ने मौखिक रूप से बरी करने का फैसला सुनाया, जबकि विस्तृत तर्कपूर्ण आदेश अभी जारी किया जाना बाकी है

कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार में भारी निराशा है और वह इससे संतुष्ठ नहीं है. पीड़ितों का कहना है उन्हें इंसाफ नहीं मिला है, वह इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे. एक दुखी परिवार के सदस्य ने आंसू रोकने की कोशिश करते हुए ANI से कहा, “हमें इंसाफ नहीं मिला. हमने अपने पति, पिता और भाइयों को खो दिया. मेरे परिवार के दस लोग मारे गए.”

गुस्सा और दुख जाहिर करते हुए, एक पीड़ित के रिश्तेदारों ने कहा कि सज्जन कुमार को फांसी होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “हम पिछले 40 सालों से लड़ रहे हैं. हम रुकेंगे नहीं, हम हाई कोर्ट जाएंगे,” उन्होंने इस झटके के बावजूद इंसाफ पाने के अपने इरादे को दोहराया.

सज्जन कुमार के वकील ने फैसले का किया स्वागत

पूर्व सांसद सज्जन कुमार के वकील अनिल कुमार शर्मा ने कहा, “कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है क्योंकि विकासपुरी और जनकपुरी मामलों में उनके खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका. हमने कोर्ट को बताया था कि उन्हें टारगेट किया गया था, क्योंकि उनकी मौजूदगी साबित नहीं हो सकी. अब तक किसी भी गवाह ने उनका नाम नहीं लिया था, लेकिन अब 32 साल बाद ऐसा हुआ है. हम उन्हें बरी करने के लिए न्यायपालिका के शुक्रगुजार हैं.”

जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामला

अगस्त 2023 में दिल्ली की एक अदालत ने कुमार पर जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों की घटनाओं के सिलसिले में दंगा करने और दुश्मनी फैलाने के आरोप तय किए थे, जबकि उन मामलों में उन्हें हत्या और आपराधिक साज़िश के आरोपों से बरी कर दिया था.

ये मामले स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की ओर से फरवरी 2015 में दर्ज की गई दो FIR से जुड़े हैं. पहली FIR जनकपुरी में हुई हिंसा से संबंधित थी, जहां 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या कर दी गई थी. दूसरी FIR गुरचरण सिंह की हत्या से संबंधित थी, जिन्हें कथित तौर पर एक दिन बाद 2 नवंबर 1984 को विकासपुरी में आग लगा दी गई.

जेल में ही रहेंगे सज्जन कुमार

आज एक मामले में बरी होने के बाद भी सज्जन कुमार जेल से बाहर नहीं आएंगे. पिछले साल 25 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में दंगों के दौरान जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या के लिए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हालांकि हत्याओं में दो बेगुनाह लोग शामिल थे, लेकिन यह मामला मौत की सज़ा देने के लिए दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है.

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