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Bundeli Rai Dance: बुंदेलखंड की महिलाओं ने ढोलक पर जमाया रंग, घूंघट में छिपे हुनर ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका

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छतरपुर: बुंदेलखंड में राई नृत्य की परंपरा पुरानी है. जब भी कोई शुभ कार्य होता है तो ग्रामीण इलाकों में राई नृत्य का आयोजन किया जाता है. चाहे विवाह का अवसर हो या घर में कोई नया मेहमान आया हो, या फिर ग्रामीण इलाकों में मेला लगता हो, तो राई नृत्य जरूर होता है. आयोजक इसका विशेष ध्यान रखते हैं, तभी तो बीते 83 सालों से मकर संक्रांति के अवसर पर प्राचीन बूढ़ा बांध पर मेले का आयोजन होता है. आयोजन में होने वाले राई नृत्य को देखने शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों से महिला पुरुष परिवार के साथ आते हैं और आनंद लेते हैं.

बुंदेलखंड में मकर संक्रांति का त्योहार 5 दिन चलता है
मकर संक्रांति का उत्सव पूरे देश में अपने-अपने तौर तरीके से मनाया जाता है. लेकिन बुंदेलखंड में मकर संक्रांति का त्योहार 5 दिनों तक चलता है. इस उत्सव को मनाने के लिए ग्रामीण इलाकों में बड़ा उत्साह रहता है. दूर दराज काम करने गए मजदूर और बाहर रहने वाले लोग मकर संक्रांति पर अपने-अपने घरों पर आ जाते हैं और फिर 5 दिनों तक जगह-जगह होने वाले आयोजनों में शिरकत करते हैं. छतरपुर जिले में मकर संक्रांति का उत्सव बसंत पंचमी तक चलता रहता है.

बूढ़ा बांध पर मेले का आयोजन
ग्रामीण इलाकों में मेलों का आयोजन होता है, जिसमें बूढ़ा बांध, जगत सागर, महराजपुर की कुमहेड नदी, कुड़नताल सहित नदी तालाब के किनारे मेलों का आयोजन प्राचीन समय से होता चला आ रहा है. जिसको देखने परिवार के साथ शहरी ओर ग्रामीण लोग जाते हैं. इन मेलों में दूर-दूर से दुकानदार अपना व्यापर करने आते हैं. वहीं, मेलों में कई तरह के सांकृतिक आयोजन होते हैं. लेकिन उनमें से सबसे खास राई नृत्य होता है, जिसको देखने भारी तादात में महिला पुरुष परिवार के साथ देखने पहुंचते हैं. जिसमें बूढ़ा बांध पर आयोजित मेला सबसे खास होता है, जो पिछले 83 सालों से आयोजित हो रहा है.

राई नृत्य पर महिलाओं ने किया डांस
इस मेले में बुंदेली राई नृत्य का आयोजन भव्य होता है. जिसमें 3 से 4 महिलाएं परंपरा के अनुसार साड़ी का घूंघट डाल कर ढोलक की थाप पर नृत्य करती हैं. बुंदेली लोक संस्कृति के प्रतीक इस मेले में राई नृत्य लोगों के दिलों पर कब्जा कर लेता है और अपनी ओर आकर्षित करता है. वहीं, बूढ़ा बांध मेले का समापन पूरी सादगी हुआ जिसमें लोगों को हुजूम में लगा रहा. इस मेले में सबसे ज्यादा गन्ने की खरीददारी होती है, जिसको ग्रामीण इलाकों में बहुत पसंद किया जाता है.

वृजपुरा गांव के सरपंच पंकज मिश्रा बताते हैं, ”यह मेला मकर संक्रांति के दो दिन पहले से शुरू होता है. जिसमें दूर-दूर से लोग देखने और खरीददारी करने ग्रामीण लोग आते हैं. शहर के लोग भी इसका आनंद लेते हैं. इस मेले में समापन के दिन बुंदेली लोकप्रिय नृत्य राई का आयोजन करवाया जाता है. नृत्य देखने के लिए बहुत भीड़ आती है. आयोजन पिछले 83 सालों से चल रहा है.”

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