Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Ram Mandir Donation Scam SIT: सुप्रीम कोर्ट में SIT का खुलासा; राम मंदिर काउंटिंग रूम से चोरी के 105... Delhi High Court PIL: डीटीसी बस हड़ताल से थमीं दिल्ली की रफ्तार; जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की पीठ करे... Faridabad CM Flying Raid: तिगांव में अवैध बुलेटप्रूफ कार वर्कशॉप पर CM फ्लाइंग का छापा; 4 लग्जरी गाड... Gurugram MCG Action: भोंडसी में नगर निगम का बड़ा बुलडोजर एक्शन; 6 अवैध भवन सील, 4 ध्वस्त Gurugram Crime News: गुड़गांव की नाथूपुर सब्जी मंडी में हिताची ATM में लगी भीषण आग; मशीन में रखा कैश... Raipur News: रायपुर उत्तर में विधायक पुरन्दर मिश्रा की 8 दिवसीय पदयात्रा; सीएम साय करेंगे आगाज, राज्... Kanker Yuva Udaan Event: '2047 तक विकसित भारत का सपना युवाओं के कंधे पर'; कांकेर में बोले युवा आयोग ... Kanker BSF Camp News: माओवाद के साये से निकलकर वर्दी के सपने; कांकेर के तुमापाल में BSF कैंप में उमड... Raipur News: भाटागांव सब्जी बाजार विवाद में आयुक्त का आश्वासन; 7 दिनों में सामने आएंगे लॉटरी आवंटन क... Chhattisgarh News: कोरबा के पूछपारा में शर्मनाक घटना; नमाजी बुजुर्ग पर हमला कर युवक फरार, मेडिकल कॉल...

Ali Larijani: कौन हैं अली लारीजानी? जानें ईरान के उस नेता की कहानी जिसके डर से अमेरिका ने टाली ‘सर्जिकल स्ट्राइक

26

ईरान पर फिलहाल अमेरिका हमला नहीं करेगा. सऊदी, कतर और ओमान की सिफारिश पर अमेरिका ने ईरान से बातचीत करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. अयातु्ल्लाह अली खामेनेई सरकार के लिए इसे एक बड़ी राहत मानी जा रही है. इस पूरे परिदृश्य में तेहरान से एक नाम की खूब चर्चा रही. वो नाम है- अली लारीजानी का, जिस पर अमेरिका ने शुक्रवार को प्रतिबंध लगा दिया.

लारीजानी ईरान की सर्वोच्च परिषद के प्रमुख हैं. कहा जा रहा है कि सर्वोच्च परिषद का प्रमुख बनने के बाद लारीजानी ने ईरान की ऐसी मज़बूत किलेबंदी की, जिसके कारण अमेरिका चाहकर भी तेहरान पर हमला नहीं कर पाया.

कौन हैं अली लारीजानी?

अगस्त 2025 में अली लारीजानी को ईरान सर्वोच्च सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया गया था. लारीजानी को राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का धुर-विरोधी माना जाता है. लारीजानी का जन्म 3 जून 1958 को हुआ था. वे एक प्रभावशाली शिया मुस्लिम परिवार से आते हैं. लारीजानी के पास डॉक्ट्रेट की डिग्री भी है.

2004 में पहली बार लारीजानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की टीम में शामिल हुए थे. उस वक्त लारीजानी को खामेनेई ने अपना सलाहकार नियुक्त किया था. लारीजानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं.

लारीजानी ने अपने करियर की शुरुआत इस्लामिक गार्ड्स में कमांडर की नौकरी से की थी. 1994 में लारीजानी को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग का प्रमुख नियुक्त किया गया. 2005 में लारीजानी राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.

लारीजानी को कट्टरपंथी खेमे के नेता माने जाते हैं. 2024 के चुनाव में लारीजानी को अयोग्य घोषित किया गया था. हालांकि, खामेनेई के करीबी होने की वजह से ईरान में उनका जलवा बरकरार रहा.

लारीजानी की कूटनीति

ईरान सुरक्षा परिषद के प्रमुख बनते ही लारीजानी कील-कांटे दुरुस्त करने में जुट गए. लारीजानी ने सबसे पहले ईरान के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले सऊदी से संपर्क साधा. लारीजानी ने पिछले 6 महीने में कम से कम 3 बार सऊदी के टॉप लीडरशिप से मुलाकात की. सितंबर 2025 में उन्होंने सऊदी के क्राउन प्रिंस से भी मुलाकात की थी.

लारीजानी ने इसके अलावा ईरान के सभी पड़ोसी देशों का दौरा किया. इनमें इराक, लेबनान और पाकिस्तान का दौरा प्रमुख था. हालिया तनाव के दौरान लारीजानी के किए गए सभी दौरे ईरान के लिए फायदेमंद साबित हुआ. वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अरब कंट्री ने अमेरिका को ईरान पर हमला न करने के लिए मनाया.

सऊदी के नेतृत्व में कतर और ओमान के नेताओं ने अमेरिका को यह समझाया कि अगर आप ईरान पर हमला करते हैं तो इसका नुकसान हम सभी को होने वाला है. तीनों ही देशों ने ईरान से बातचीत की पहल की, जिसके बाद अमेरिका हमले को लेकर अपना रूख बदल लिया.

बवाल कंट्रोल के लिए खुद एक्टिव

ईरान में विरोध प्रदर्शन ने जब विद्रोह का रूप लिया, तो लारीजानी खुद एक्टिव हो गए. सबसे पहले उन्होंने ईरान सेना में 3 बड़े बदलाव कराए. इसके तहत अहमद वाहिदी को उप कमांडर नियुक्त किया गया. वाहिदी पर अमेरिका सालों पहले बैन लगा चुका है. साथ ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया को सेना का प्रवक्ता नियुक्त किया गया.

बवाल के दौरान सरकार की तरफ से लारीजानी खुद टीवी पर इंटरव्यू देते नजर आए. लारीजानी ने ही पूरे विद्रोह को सबसे पहले अमेरिका और इजराइल से जोड़ा. लारीजानी का कहना था कि इस्लामिक स्टेट जैसा अटैक अमेरिका ने ईरान में करवाया. इसे ईरान की मीडिया ने खूब प्रचार किया.

अमेरिका ने अब बैन लगाया

अमेरिका ने लारीजानी पर अब बैन लगा दिया है. यह बैन ट्रंप के उस फैसले के तुरंत बाद लगाया गया, जब उन्होंने ईरान पर स्ट्राइक को होल्ड करने का आदेश दिया. एनबीसी के मुताबिक व्हाइट हाउस सुरक्षा परिषद की बैठक में कोई भी अधिकारी इस बात की गारंटी नहीं दे पाए कि स्ट्राइक के तुरंत बाद ईरान में तख्तापलट हो जाएगा.

बैठक में सेना ने राष्ट्रपति से कहा कि ईरान पर अगर निर्णायक हमला नहीं होता है तो हमें जंग में कूदना पड़ सकता है. अमेरिकी सैनिक फिलहाल ईरान से जंग लड़ने को तैयार नहीं है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.