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संभल कोर्ट का बड़ा फैसला: 52 जुम्मे और 1 होली वाले बयान से चर्चा में आए अफसर की बढ़ीं मुश्किलें

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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के ASP अनुज चौधरी एक बार फिर चर्चा में हैं. वजह है संभल हिंसा में कोर्ट का उनके खिलाफ आया फैसला. अनुज चौधरी पर CJM कोर्ट ने FIR का आदेश दिया है. संभल हिंसा के दौरान पुलिस पर आलम नाम के किशोर पर गोली चलाने का आरोप था. आलम के पिता यामीन ने संभल में CO रहे अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कराए जाने के लिए कोर्ट से गुहार लगाई थी. कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए अनुज चौधरी सहित 12 पर FIR के निर्देश दिए.

24 नवंबर, 2024 को संभल के शाही जामा मस्जिद इलाके में सर्वे के दौरान हालात बिगड़े थे. हजारों लोगों की भीड़ जमा हुई थी. पथराव हुए थे और फायरिंग की गई. यामीन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी उनका बेटा आलम जामा मस्जिद पर बिस्किट बेचने गया था. वह जैसे ही वहां पहुंचा पुलिस ने उसे गोली मार दी.

कौन हैं अनुज चौधरी?

अनुज चौधरी का जन्म 5 अगस्त, 1980 को हुआ था. मुजफ्फरनगर के बधेरी गांव में उनका जन्म हुआ था. वह साल 2012 में स्पोर्ट्स कोटे से यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर बने थे. अनुज चौधरी जब उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हुए, तो वह कोई आम रिक्रूट नहीं थे. 2004 के एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इस पहलवान के नाम अर्जुन अवॉर्ड जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान हैं. 2003 में उन्हें इंस्पेक्टर और 2012 में CO बनाया गया. 13 साल तक इस पद पर रहने के बाद 2025 में उन्हें एडिशनल SP बनाया गया.

संभल ने शान के साथ दाग भी दिया

कोर्ट का अब आया आदेश अनुज चौधरी के लिए बड़ा झटका है. एक तरह से ये उनकी वर्दी पर दाग लगा है. ये दाग भी उस शहर ने दिया है जिसने कुछ समय पहले उनकी शान बढ़ाई थी. दरअसल, संभल अनुज चौधरी के करियर में टर्निंग प्वाइंट रहा है. इसी शहर ने उन्हें पहचान दी.

अनुज चौधरी 16 दिसंबर, 2023 को संभल भेजे गए थे. यहां पर उनका कार्यकाल विवादों और चर्चाओं से भरा रहा. 2024 की हिंसा के वक्त अनुज चर्चा में आए थे. 24 नवंबर, 2024 को संभल में हिंसा भड़की थी और इसके करीब 9 महीने बाद उनका प्रमोशन हुआ था. वह एडिशनल SP बनाए गए. अभी उनकी तैनाती फिरोजाबाद में है.

संभल में तैनाती के वक्त उनके बयानों की चर्चा होती थी. होली साल में एक बार, जुम्मा साल में 52 बार वाले उनके बयान को कौन भूल सकता है. इस बयान ने उन्हें विपक्ष के निशाने पर ला दिया था. पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने तो इस बयान को लेकर उनके खिलाफ मोर्चा तक खोल दिया था.

उन्होंने कहा था कि अनुज चौधरी सेवा और वर्दी नियमों का उल्लंघन करते हैं. वह बिना अधिकार के बयानबाजी करते हैं. अपने कार्यों को सांप्रदायिक रंग देते हैं. इससे माहौल तनावपूर्ण होता है और कुछ वर्गों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है. हालांकि सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक कार्यक्रम में अनुज के बयान का समर्थन करते हुए उन्हें पहलवान कहा था.

सोशल मीडिया पर तगड़ी फैन फॉलोइंग

अनुज भले ही विपक्षियों के निशाने पर रहते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है. इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. वह वर्कआउट रील्स के साथ-साथ मंदिरों में पूजा करते हुए खुद के वीडियो भी पोस्ट करते हैं. चौधरी के सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर लगाते हुए उनके छोटे-छोटे वीडियो भरे पड़े हैं. अक्सर, वह ऐसी रील्स शेयर करते हैं जिनमें वह पुलिस यूनिफॉर्म पहने हुए धार्मिक अनुष्ठान करते या मूर्तियों को माला पहनाते दिखते हैं. नवंबर की हिंसा के कुछ ही दिनों बाद अनुज चौधरी ने मस्जिद के पास एक बंद पड़े मंदिर को खोल दिया था. वर्दी पहने हुए मूर्ति से धूल हटाते और घंटी बजाते हुए उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं.

रामपुर में आजम खान से भिड़ गए थे अनुज

2023 में अनुज चौधरी की तैनाती रामपुर में थी. तब उनकी सपा नेता आजम खान से बहस हो गई थी. इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था. आजम खान और उनके परिवार का उत्पीड़न किए जाने के खिलाफ शिकायत करने सपा नेता पहुंचे थे. इस दौरान ज्यादा लोग उमड़े तो अनुज ने रोक लिया. उन्होंने कहा कि 27 लोग ही जा सकते हैं. इसपर आजम गाड़ी से उतरकर अनुज चौधरी की ओर बढ़े. आजम ने उन्हें अखिलेश यादव के दौर में पुलिस की नौकरी मिलने का अहसान याद दिलाने की कोशिश की. आजम ने कहा कि अखिलेश का अहसान याद है. इसपर अनुज ने कहा कि कैसा. अर्जुन अवॉर्ड मिला है. ये किसी के अहसान से नहीं मिलता. इसपर आजम खान चुप हो गए.

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