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भोपाल में रोड पर अचानक गिरा युवक, इंस्पेक्टर विवेक फरिश्ता बन आए और बचाई जान

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भोपाल : आजकल हार्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. सामान्य अवस्था में भी हार्ट फेल होने की घटनाएं हो रही हैं. यहां तक कि रोड पर चलते, डांस करते समय भी लोग जमीन पर गिर जा रहे हैं. कई ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं कि हार्ट अटैक के बाद अगर संबंधित व्यक्ति को तुरंत सीपीआर दी जाए तो उसकी जान बच जाती है.

इसलिए सभी लोगों को सीपीआर की जानकारी होनी चाहिए. सोमवार को भोपाल में पुलिस सब इंस्पेक्टर ने एक युवक की सीपीआर देकर जान बचा ली.

भीड़ देख मौके पर पहुंचे सब इंस्पेक्टर

घटना भोपाल के हनुमानगंज थाना क्षेत्र के नादरा बस स्टैंड के पास की है. एक युवक रोड चलते-चलते अचानक गिर पड़ा. देखते ही देखते युवक की हालत बेहद गंभीर हो गई. उसे हार्ट अटैक पड़ा था. ये देखकर मौके पर लोग घबरा गए. भीड़ देखकर मौके पर हनुमानगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर विवेक शर्मा पहुंचे और स्थिति की गंभीरता को समझा. उन्होंने बिना देर किए युवक को तुरंत सीपीआर देना शुरू किया. कुछ ही देर में युवक को होश आ गया.

स्वस्थ होने के बाद युवक ने एसआई का आभार जताया

इसके बाद युवक को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत में अब सुधार है. युवक की जान बचाने वाले पुलिस सब इंस्पेक्टर विवेक शर्मा का कहना है “उन्होंने सीपीआर का विधिवत प्रशिक्षण लिया है. सीपीआर आपात स्थिति में जीवनरक्षक साबित होता है. प्रशिक्षण का सही समय पर सही उपयोग कर उन्होंने एक अनमोल जीवन बचाया.” युवक के साथ मौजूद दोस्त के अनुसार वह पंजाब का रहने वाला है.

वहीं, होश में आने के बाद युवक ने भी एसआई विवेक शर्मा का आभार जताया और धन्यवाद दिया. इस मामले में हनुमानगंज थाना प्रभारी अवघेश भदौरिया ने कहा “एसआई विवेक शर्मा की सक्रियता से पुलिस का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है.” मौके पर मौजूद लोगों ने भी सब इंस्पेक्टर विवेक शर्मा की जमकर सराहना की.

हाल की कुछ घटनाएं, जिनमें सीपीआर से बची जान

  • 01 जनवरी 2026 : उज्जैन में एक व्यक्ति रेलवे स्टेशन पर अचानक बेसुध होकर गिर पड़ा. जीआरपी के प्रधान आरक्षक पवन धुर्वे ने सीपीआर देकर यात्री की जान बचाई.
  • 22 दिसंबर 2025 : उज्जैन के नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी ने गश्त के दौरान युवक की सीपीआर देकर जान बचाई. डीजीपी ने 10 हजार इनाम देने की घोषणा की.
  • 22 दिसंबर 2025 : उज्जैन रेलवे स्टेशन पर यात्री को अचानक हार्ट अटैक आया. रेलवे कर्मी ने सीपीआर देकर जान बचाई. हालांकि अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया.
  • 24 जुलाई 2025 : उज्जैन के नागदा सन्नी गहलोत सीने में दर्द उठा. वह चौधरी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर पहुंचा. डॉ जयपाल युवक का ब्लड प्रेशर चेक कर रहे थे. तभी युवक कुर्सी से बैठे-बैठे गिरने लगा. डॉ जयपाल ने युवक को तत्काल सीपीआर और इलेक्ट्रिक शॉक 40 मिनट तक दिया. इससे उसकी जान बची.
  • 09 नवंबर 2025 : बड़वानी आरटीओ ऑफिस के सामने एक व्यक्ति अचानक सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़ा. वहां से गुजर रहे तलवाड़ा बुजुर्ग में पदस्थ डॉ. किशोर मुकाती ने सीपीआर देकर युवक को नया जीवन दिया.
  • 05 नवंबर 2025 : विदिशा में अंधविश्वास के चलते महिला की जान जाते-जाते बची. महिला की सांसे थमने वाली थीं. समय रहते परिजन महिला को लेकर अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टरों ने सीपीआर देकर जान बचा ली.

सीपीआर से कैसे बचती है जिंदगी

सीपीआर कोई भी कर सकता है. कॉर्डियक अरेस्ट के दौरान, हृदय रक्त पंप करना बंद कर देता है और व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है. ऑक्सीजन की कमी के 4 से 6 मिनट के भीतर मस्तिष्क को क्षति हो सकती है. अगर व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिलती है तो मौत हो सकती है. सीपीआर के तहत हॉर्ट में ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए छाती को मैन्युअल रूप से पंपिंग कराई जाती है.

दूसरे तरीके में मुंह से सांस देते हैं

कुछ मामलों में फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए मुंह से सांसें देते हैं. सीपीआर के तहत छाती पर दबाव डालना पड़ता है. प्रति मिनट लगभग 100-120 बार छाती पर दबाव डाला जाता है. यह क्रिया मस्तिष्क और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों में ब्लड सर्कुलेशन करने में मदद करती है. हॉर्ट अटैक के दौरान ब्लड सरकुलेशन को बनाए रखने के लिए गहरा और लगातार दबाव डालना आवश्यक है.

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