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मेरठ में दलित महिला की हत्या से भारी बवाल: बेटी को उठा ले गए बदमाश, गांव बना छावनी; पुलिस की 10 टीमें तैनात

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मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड गांव में एक दलित महिला की हत्या से बवाल मचा हुआ है. हत्या का आरोप गांव के ही रहने वाले पारस राजपूत नाम के युवक पर लगा है. आरोप है कि पारस राजपूत ने दलित महिला की हत्या कर उसकी बेटी को अगवा कर लिया, जिसके बाद से गांव में तनाव फैल गया. पिछले करीब 30 घंटे से हंगामा चल रहा है. गांव में भारी संख्या में पुलिस तैनात है. मृतक महिला के परिजन और दलित समाज के लोग अंतिम संस्कार नहीं कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले पुलिस अगवा की गई लड़की को बरामद करे. मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. सपा की महिला कार्यकर्ताओं ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों पर चूड़ियां फेंकी, जबकि भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की.

ऐसा माना जा रहा है कि लड़की को अगवा करने के दौरान उसकी मां सुनीता ने विरोध किया था. इसके बाद पारस राजपूत ने गंडासे से महिला सुनीता के सिर पर वार कर दिया, जिससे सुनीता घायल हो गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. यही आरोप सुनीता के परिजनों के द्वारा पारस पर लगाया गया है. वहीं पारस राजपूत के परिजनों का कहना है कि पारस अभी नाबालिग है और वह युवती बालिग है. दोनों के बीच में प्रेम प्रसंग था. पहले भी ये दोनों पकड़े गए थे, लेकिन पंचायत में समझौता करा दिया गया था और 50 हजार रुपए भी दिए गए थे.

DM-SSP तक गांव में मौजूद

वहीं गुरुवार की घटना को लेकर पारस के परिजनों का कहना है कि लड़की ने फोन कर के पारस को बुलाया था. पारस को जानकारी नहीं थी कि लड़की के साथ और कौन है. पारस जब वहां पहुंचा तो उसकी मां साथ थी. मां ने विरोध किया और लड़की ने ही गंडासा मार दिया था. पारस के परिजनों का कहना है कि लड़की ने ये खेल खुद ही रचा है. फिलहाल पुलिस हर पहलू पर जानकारी जुटा रही है. गांव में DM-SSP के साथ-साथ कई थानों की फोर्स तैनात है.

SSP डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि लड़की की बरामदगी और अभियुक्त को ढूंढना, हमारी पहली प्राथमिकता है. पुलिस की 10 टीमों को दोनों को ढूंढने के लिए लगाया गया है. कुछ लोग हिरासत में लिए गए हैं, जिनसे पूछताछ चल रही है. मुकदमे में हत्या की धाराएं भी जोड़ी गई हैं.

दलित समाज गांव में प्रदर्शन कर रहा

वहीं मृतक सुनीता के शव को लेकर दलित समाज के लोग और पीड़ित परिवार गांव में प्रदर्शन कर रहा है. परिवार के लोगों ने शव के अंतिम संस्कार की शर्त पुलिस के सामने रख दी है. सुनीता के पति सतेंद्र का कहना है कि अंतिम संस्कार तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक उनकी बेटी को पुलिस लेकर नहीं आएगी. पुलिस फिलहाल परिवार के लोगों को समझाने में लगी हुई है. सतेंद्र ने बताया कि गुरुवार सुबह वो खेत में चला गया था. उसकी पत्नी और बेटी दोनों घर से आ रहे थे, तभी पारस राजपूत उनकी बेटी से छेड़खानी करने लगा और उसकी पत्नी पर भी जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई.

SP देहात परिजनों को समझाने में जुटे

पीड़ित सतेंद्र ने पत्नी सुनीता के अंतिम संस्कार नहीं करने के सवाल पर कहा कि पुलिस पहले उनकी बेटी को बरामद करे, उसके बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा. SP देहात अभिजीत कुमार परिजनों को समझाने और स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं सुनीता के शव को लेने पहुंची एंबुलेंस में आक्रोशित दलित समाज के लोगों ने तोड़फोड़ की और शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया. गांव में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

मामले ने राजनीतिक रंग लिया

इस हत्याकांड और अपहरण मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है. मृतक सुनीता के घर पहुंचीं सपा की महिला कार्यकर्ताओं ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों पर चूड़ियां फेंकी. साथ ही जमकर हंगामा किया. इसके साथ ही सपा कार्यकर्ताओं के साथ मृतक महिला सुनीता के परिजनों से मिलने जा रहे सरधना विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने गांव में घुसने नहीं दिया. उन्हें गांव के ही मोड पर रोक लिया गया, जिसके बाद वह वहीं धरने पर बैठ गए.

इसके साथ ही भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्रशेखर ने वीडियो कॉल पर पीड़ित परिजनों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की. ADM से उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन की गुंडई नहीं चलेगी. सांसद चंद्रशेखर ने आंदोलन की धमकी भी दी.

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