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फ्लोराइड युक्त पानी सफेद से पीले कर रहा बच्चों के दांत, खो रही आंखों की रोशनी

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खंडवा: इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब खंडवा के किल्लौद क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. किल्लौद ब्लॉक के कई गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से इस समस्या की शिकायत के बावजूद शुद्ध पेयजल की ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी प्रभावित हो रहे हैं.

किल्लौद क्षेत्र में फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या

किल्लौद ब्लॉक के 12 से अधिक गांवों में पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक से कहीं अधिक पाई जा रही है. ग्रामीण शिवराज सिंह सिसोदिया के अनुसार, “कई स्थानों पर यह मात्रा 2.0 से 5.0 पीपीएम तक है. लगातार फ्लोराइड युक्त पानी पीने से बच्चों के दांत पीले हो रहे हैं. युवाओं में भी हड्डियों व जोड़ों से जुड़ी परेशानियां सामने आ रही है.”

स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर

शिवराज सिंह का कहना है, “फ्लोराइड युक्त पानी पीने से दांतों का रंग बदलना, हाथों का ठीक से न मुड़ पाना, जोड़ों में दर्द, आंखों की कमजोरी और लीवर में संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. कुछ गांवों में कम उम्र में ही लोग उम्रदराज नजर आने लगे हैं. इसके अलावा बालों का समय से पहले सफेद होना और दांतों का गिरना भी आम शिकायत बनती जा रही है.”

ग्रामीणों की शिकायत और प्रशासन तक पहुंच

समस्या से परेशान ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर शुद्ध पेयजल की मांग की. उनका आरोप है कि “वे लंबे समय से फ्लोरोसिस और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दूषित जल स्रोतों की पहचान तो की, लेकिन उन्हें बंद करने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए.

ग्राम गरबड़ी की स्थिति चिंताजनक

किल्लौद ब्लॉक के ग्राम गरबड़ी निवासी शिवराज सिंह सिसोदिया ने बताया कि गांव में नल-जल योजना के तहत जिस पानी की सप्लाई हो रही है. वह भी फ्लोराइड युक्त है. करीब 3000 की आबादी वाले इस गांव में पीने के पानी का एक ही बोरवेल, जिससे पूरे गांव में पानी सप्लाई होता है. इसी कारण गांव के अधिकतर लोग स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं.”

प्रशासन की कार्रवाई और दावे

कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने बताया, “किल्लौद ब्लॉक के कुछ गांवों से पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा की जानकारी मिली है. इसके बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम ने जांच की. जिन हैंडपंप और ट्यूबवेल में फ्लोराइड अधिक पाया गया है, वहां लाल निशान लगाए गए हैं और ग्रामीणों से उस पानी का उपयोग न करने की अपील की गई है.”

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