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सफेद चादर में लिपटा बुंदेलखंड: फसलों को ‘पाले’ से बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञों की बड़ी सलाह

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सागर : सागर सहित आसपास के जिलों में शीतलहर के साथ ही कोहरे अपने रौद्र रूप में है. पूरे बुंदेलखंड में शाम होते ही लोग घरों में दुबकने को मजबूर. कोहरे ने ना सिर्फ वाहनों की रफ्तार को काम कर दिया, बल्कि जनजीवन पर भी असर डाला. पहली जनवरी की शाम से तेजी से पारा गिरने लगा और शीत लहर का असर दिखने लगा. सुबह दूसरे दिन जब लोग जागे तो आसमान में घना कोहरा कब्जा किए हुए था.

पूरे बुंदेलखंड में पिछले एक हफ्ते से शीत लहर का प्रकोप है. मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण यह हालात बने हैं. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि शीतलहर के चलते रात के तापमान में तेजी से कमी होने के कारण फसलों में पाला लगने के आसार हैं.

जगह-जगह जल रहे अलाव बने सहारा

नए साल 2026 की सुबह तो खुली धूप के साथ हुई थी. लेकिन शाम होते-होते मौसम का मिजाज एकदम बदल गया और तापमान तेजी से गिरने लगा. इसका असर ये हुआ कि नए साल के दूसरे दिन 2 फरवरी शुक्रवार को आसमान में घने कोहरे के साथ शीतलहर का प्रकोप देखने मिला.

कोहरा इतना घना था कि कुछ ही मीटर की दूरी पर कुछ नजर नहीं आ रहा था. घने कोहरे के कारण जनजीवन पर असर देखने को मिला. वाहनों की रफ्तार धीमी नजर आई. शीतलहर के चलते लोग अलाव जलाकर ठंड से बचने के उपाय करते नजर आए.

पहाड़ी इलाकों बर्फबारी से ठंड बढ़ी

मौसम विज्ञान केंद्र सागर के प्रभारी वैज्ञानिक विवेक क्षेत्रोले ने बताया “मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के कारण देश के उत्तरी इलाकों में काफी बर्फबारी हो रही है. बर्फबारी के कारण ठंडी हवाएं देखने को मिल रही हैं और इसका असर बुंदेलखंड में भी देखने को मिल रहा है. पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फबारी से बुंदेलखंड में तेजी से तापमान गिरा है और आने वाले कुछ दिनों तक ऐसे ही हालत रहने की उम्मीद है.”

अभी तक जितने भी पश्चिमी विक्षोभ बन रहे थे, वह कमजोर थे. लेकिन फिलहाल जो पश्चिमी विक्षोभ है, वह काफी मजबूत है और उसका असर चारों तरफ देखने मिल रहा है.

चना मसूर और मटर में पाल लगने से कैसे बचाएं

मौसम में दिखा ये बदलाव रबी सीजन की फसलों के लिए चिंताजनक है. कृषि वैज्ञानिक राजेश द्विवेदी का कहना है रात का तापमान तेजी से गिरने से फसलों में पाला लग सकत सकता है. खासकर मसूर, चना और मटर की फसलों में पाला लगने की आशंका है.

फसलों को पाले से बचाने के लिए कृषि के जानकार बताते हैं. पाला दे रात 12 से 2 बजे के आसपास लगता है. इसलिए इस दौरान फसल के आसपास, मेड़ों पर रात में कूड़ा-कचरा या घास-फूस जलाएं. धुआं करने से पाला नहीं लगेगा. धुआं करने के लिए क्रूड ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है. सब्जी वाली फसलों को टाट, पॉलिथीन अथवा भूसे से ढ़ंका जा सकता है.

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