चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चोरी हुए 328 सरूपों के मामले को लेकर एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंथक जत्थेबंदियों और सिख संस्थाओं की ओर से सरकार तक संदेश पहुंचे थे कि 328 सरूप कहां हैं, इसकी जांच करवाई जाए। हाल ही में संत समाज की कई जत्थेबंदियों ने एकत्र होकर सरकार को मांग पत्र भी सौंपा था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले की गहराई से जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया है, तांकि यह पता लगाया जा सके कि इस घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अब अचानक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहने लगी है कि यह मामला केवल पैसों के घपले का है, जिससे ऐसा लग रहा है कि कमेटी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सरूप चोरी होने के मामले से पल्ला झाड़ लिया है। इससे संगत में कई तरह के संदेह पैदा हो गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि SGPC अध्यक्ष खुद मान चुके हैं कि 10–20 घोटाले रोज होते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास SGPC की अंतरिम कमेटी के प्रस्ताव मौजूद हैं, जिनमें स्वीकार किया गया है कि सरूपों की संख्या कम हुई है। पहले SGPC ने कहा था कि घटे हुए सरूपों की रिकवरी के लिए कार्रवाई की जाए और अध्यक्ष इस मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए भी तैयार थे। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड में बार-बार छेड़छाड़ की गई। उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट सतिंदर सिंह कोहली की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े होते हैं, जिन्हें SGPC द्वारा करोड़ों रुपए की तनख्वाह दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि कोहली सुखबीर बादल का काम भी देखता था। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पहले चोरी हुए सरूपों के मामले में SGPC ने कानूनी कार्रवाई के प्रस्ताव पास किए, लेकिन बाद में फंसने के डर से सभी प्रस्ताव रद्द कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों का श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा से कोई लेना-देना नहीं है और अब इन्हें डर है कि एसआईटी की पूछताछ में उनके कच्चे चिट्ठे खुल जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि SGPC अध्यक्ष को कठपुतली की तरह चलाया जा रहा है।
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