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भाजपा पार्षद का निर्वाचन शून्य करने का फैसला हाईकोर्ट ने पलटा, पद पर बनी रहेंगी निशा देवलिया

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इंदौर : हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने वार्ड क्रमांक 44 की पार्षद रहीं निशा देवलिया को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उनके पार्षद चुनाव को शून्य किए जाने के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले को पलट दिया है. उनकी जगह डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी नंदिनी मिश्रा को विजयी घोषित कर दिया था. हाईकोर्ट ने इसे भी पलटते हुए भाजपा प्रत्याशी निशा देवलिया को ही पद पर बरकरार कर दिया है.

क्या है पार्षद चुनाव शून्य किए जाने का मामला?

इंदौर जिला कोर्ट ने पिछले दिनों वार्ड क्रमांक 44 की पार्षद निशा देवलिया और उनके सामने खड़ी हुईंं प्रत्याशी व याचिकाकर्ता नंदिनी मिश्रा और युवराज सिंह की याचिका पर सुनवाई की थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ने आरोप लगाया था कि निशा देवलिया ने नामांकन के दौरान प्रस्तुत शपथ-पत्र में अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी छुपाई और उसमें कई विसंगतियां हैं. इसपर जिला कोर्ट ने वार्ड क्रमांक 44 की पार्षद निशा देवलिया के चुनाव को शून्य करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी नंदिनी मिश्रा को विजय घोषित कर दिया था.

निशा देवलिया ने दी थी जिला कोर्ट के आदेश को चुनौती

जिला कोर्ट के द्वारा जिस तरह से आदेश दिया गया, उसे लेकर पार्षद रहीं निशा देवलिया ने हाईकोर्ट की इंदौर बैंच में चुनौती दी. निशा देवलिया ने कोर्ट को बताया कि उन्हें 6981 वोट मिले तो वहीं उनके सामने खड़ी हुई कांग्रेस की प्रत्याशी नंदिनी मिश्रा को 5962 वोट मिले थे. इसके बाद हारी हुईं प्रत्याशी नंदिनी मिश्रा ने उनके खिला संपत्ति से जुड़ी जानकारी छिपाने के आरोप लगा दिए, लेकिन इसके लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिए.

निशा देवलिया के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं

हाईकोर्ट ने पूरे मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता नंदिनी मिश्रा और याचिकाकर्ता युवराज सिंह की ओर से दायर जिला कोर्ट की याचिका में कुछ तर्क दिए गए और उन्हीं अनुमानों पर जिला कोर्ट ने फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोप साबित करने वाले का बोझ याचिकाकर्ता का होता है लेकिन उनके द्वारा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए. कोर्ट ने कहा कि संपत्ति कर चोरी के आरोपों पर सबूत पेश न करने से आरोप काल्पनिक लगते हैं और इसके आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इसी के साथ हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के फैसले को पलट दिया.

कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी घोषित करना भी गलत

कोर्ट ने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि रिटर्निंग कैंडिडेट का चुनाव रद्द होने पर रनरअप विजय घोषित नहीं किया जा सकता, जब तक साबित ना हो कि वोटरों ने वैकल्पिक रूप से उसे चुना हो. इस आधार पर कांग्रेस प्रत्याशी नंदिनी मिश्रा को विजयी घोषित करने का आदेश भी रद्द किया गया.कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रकिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी है ना कि राजनीतिक द्वेष से प्रेरित. कोर्ट के फैसले के साथ भाजपा प्रत्याशी निशा देवलिया ही वार्ड 44 की पार्ष होंगी. इसपर उनके पति रूपेश देवलिया ने कहा, ” कोर्ट का यह फैसला न्याय की जीत है.”

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