Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
EVM में टोटलाइजर से क्यों नहीं हो सकती वोटों की गिनती?: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मां... किशनगंज: खकवा नदी के तेज बहाव में तैरकर जनाजा ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने डीएम और बिहार सरकार से... शिवपुरी में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 10 दिनों में एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत, डेंगू-मलेरिया निगे... भारतीय मुसलमानों के अधिकारों के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन: नई दिल्ली में ऐलान अफगानिस्तान टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान: श्रेयस अय्यर बने कप्तान, युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी... 'सैयारा' फेम अनीत पड्डा की नई सीरीज 'हुंकार: द रोर' का टीजर रिलीज: जानें कहानी, स्टार कास्ट और OTT र... नेपाल में 180 km/h की रफ्तार से आई 'हिमालयी सुनामी': रसुवा-धाडिंग में भारी तबाही, सुरंगों में बचाव क... LIC के दो नए धमाकेदार प्लान: गारंटीड सेविंग्स के साथ मिलेगा प्योर लाइफ कवर, 7 सितंबर से शुरू होगी बि... UPI का नया रिकॉर्ड: अगस्त में ₹29.82 लाख करोड़ का लेनदेन, कुल 2,451 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज; NPCI ने ... श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भोग माखन-मिश्री और पंचामृत की विधि; जानें मलाई से शुद्ध माखन बनाने का आसान न...

नोएडा पुलिस की ‘बदसलूकी’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! UP सरकार को नोटिस जारी, कोर्ट ने कहा- ‘थाने की CCTV फुटेज पेश करो

30

सुप्रीम कोर्ट ने आज उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस को एक रिट याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें एक महिला वकील ने आरोप लगाया है कि नोएडा के एक पुलिस स्टेशन में उन्हें रात भर चौदह घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और पुलिस अधिकारियों द्वारा उनके पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करते समय उनके साथ यौन उत्पीड़न, यातना और जबरदस्ती की गई.

जस्टिस विक्रम नाथ और एनवी अंजारी की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी), 21 और 22 के तहत याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप वाली याचिका पर 7 जनवरी, 2026 को सुनवाई करना तय किया और यूपी सरकार व पुलिस को नोटिस जारी किया.

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता, जो एक महिला वकील हैं. आरोप है कि उन्हें पुलिस स्टेशन में वर्दीधारी पुलिस कर्मियों द्वारा 14 घंटे की अवैध हिरासत, हिरासत में यौन उत्पीड़न, यातना और जबरदस्ती का शिकार बनाया गया. नोएडा सेक्टर 126, उत्तर प्रदेश में 3 दिसंबर 2025 की देर रात को एक यौन उत्पीड़न की घटना घटी, जब वह अपने मुवक्किल के प्रति अपने पेशेवर कर्तव्य का निर्वहन कर रही थीं.

याचिकाकर्ता ने दी यह दलील

एडवोकेट अनिलेंद्र पांडे के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता दिल्ली के शाहदरा बार एसोसिएशन में पंजीकृत एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट हैं. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह घटना 3 दिसंबर की रात को घटी, जब वह अपने मुवक्किल की सहायता के लिए पेशेवर पोशाक में नोएडा सेक्टर 126 पुलिस स्टेशन पहुंचीं, जिन्हें सिर में गंभीर चोटें आई थीं और वह एफआईआर दर्ज करवाना चाहते थे.

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वीकार की याचिका

अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि आमतौर पर इस तरह की याचिकाएं सीधे स्वीकार नहीं होती हैं, लेकिन सीसीटीवी कैमरों के बंद होने का मुद्दा भी कोर्ट के ध्यान में है, ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस केस को स्वीकार किया जा रहा है. अदालत ने नोएडा पुलिस को आदेश दिया है कि CCTV फुटेज को सीलबंद करके उन्हें सुरक्षित रखा जाए और 7 जनवरी को कोर्ट के सामने पेश किया जाए. अब देखना है कि 7 जनवरी को होने वाली सुनवाई में नोएडा पुलिस की ओर से अपने बचाव में क्या तथ्य सामने रखे जाते हैं और किस तरह की दलील पेश की जाती है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.