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MP में ‘लाल आतंक’ का खात्मा! 41 जवानों की शहादत के बाद 35 साल में बालाघाट कैसे हुआ नक्सलवाद से मुक्त? जानें पुलिस की रणनीति

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मध्य प्रदेश का बालाघाट 35 साल बाद आखिरकार साल 2025 खत्म होते-होते नक्सल मुक्त हो ही गया. क्या आप जानते हैं 1991 में नक्सलियों ने पहली घटना को अंजाम दिया और ब्लास्ट कर 9 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. तब से अब तक बालाघाट जिला 35 सालों से लाल आतंक के दहशत में था. कई जवानों ने अपनी शहादत से बालाघाट को नक्सल मुक्त करने में बड़ी भूमिका अदा की है. जानिए बालाघाट कैसे बना नक्सल मुक्त जिला?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 21 मार्च 2025 को घोषणा की थी और देशवासियों को यह भरोसा दिलाया कि 31 मार्च 2026 से पहले ‘नक्सलवाद’ पूरी तरह खत्म हो जाएगा. अभी तो डेड लाइन करीब आने में 4 माह शेष बचे हैं, लेकिन अभी से ही नक्सलियों में ‘सरेंडर’ करने की होड़ मच गई है. माओवादियों ने बालाघाट में एक के बाद एक एक करके 41 दिनों के अंतराल में 13 सक्रिय नक्सलियों ने हथियार डालें हैं. इसी के साथ बालाघाट में पूर्णत से माओवादी का खात्मा हो गया.

सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने VC में कहा कि MP से नक्सलवाद खत्म हो गया. उन्होंने कहा कि “लाल सलाम को आखरी सलाम” पुलिस महानिरीक्षक संजय कुमार ने कहा कि बालाघाट जिला अब नक्सल मुक्त हो गया है. एक भी नक्सली अब यहां नहीं बचा. आखिरी दो नक्सलियों, दीपक और उसके साथी ने भी अब सरेंडर कर दिया है.

बालाघाट में नक्सलवाद की शुरुआत…

बालाघाट जिले में साल 1990 में थाना बिरसा में नक्सलियों के विरुद्ध पहली एफआईआर दर्ज की गई. नक्सलवाद खत्म करने के चलते कई घटनाएं हुईं. साल 1991 में नक्सलियों ने थाना बहेला क्षेत्रान्तर्गत सीतापाला में ब्लास्ट किया था. इसमें 09 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. तब से लेकर अब तक नक्सल विरोधी अभियान में 38 पुलिसकर्मी शहीद हुए. लाल आतंक के कारण 57 आम नागरिक भी जनशहीद हुए. इस दौरान 45 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए और 28 हार्डकोर नक्सली गिरफ्तार किया गए. इस दौरान हॉक फोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा फोर्स, पुलिस जवान के 2200 से अधिक जवानों ने मोर्चा संभाला और 1 नवंबर से 11 दिसंबर तक 43 दिनों के भीतर 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. अब MMC जोन के मलाजखंड डिविजन से सक्रिय रहे दीपक ने अपने साथी के साथ समर्पण कर दिया. इसके साथ ही बालाघाट पर लगा नक्सलवाद का 35 साल पुराना कलंक भी धुल गया. और अब बालाघाट जिला नक्सल मुक्त घोषित हो गया.

बालाघाट की कमान तीन नक्सलियों ने संभाली थी

पुलिस महानिरीक्षक संजय कुमार ने कहा कि बालाघाट जिले के रहने वाले तीन नक्सली ने कमान संभाली थी, जिसमें संगीता और संपत राशिमेटा के रहने वाले हैं. वहीं, दीपक पालागोंदी का रहने वाला है. इन्होंने ही बालाघाट में नक्सली वारदात को बढ़ावा दिया और कई घटनाओं को अंजाम दिया. ये लोग विकास में रुकावट, निर्माण कार्य में लगे वाहनों को जलाना और मुखबिरी के शक में ग्रामीणों की हत्या कर दहशत फैलाने का कार्य करते थे. बढ़ती सर्चिंग के दौरान एक के बाद एक तीनों ने सरेंडर करते ही बालाघाट जिला नक्सल मुक्त हो गया.

दीपक के सरेंडर से ही नक्सल मुक्त बालाघाट

दीपक मोहनपुर पंचायत के गांव पालागोंदी का रहने वाला है. सन 1995 के करीब नक्सली संगठन से जुड़ा और मलाजखंड दलम में सक्रिय था और वह MMC जोन में DVCM याने डिविजनल कमेटी मेंबर था. जिस पर तीनों राज्य (छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश) में 29 लाख का ईनाम घोषित था. दीपक ने एक स्टेनगन के साथ जैसे ही हथियार डालते ही MP नक्सली मुक्त हो गया.

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