Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

सुप्रीम कोर्ट-हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति में आरक्षण नहीं! सरकार ने लोकसभा में दिया स्पष्ट जवाब, कानून मंत्री ने बताया क्या है कारण

17

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए संविधान में किसी भी जाति या वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है. मंगलवार को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 224 के तहत जजों की नियुक्ति होती है, जिनमें आरक्षण शामिल नहीं है. इसी कारण सरकार श्रेणीवार डेटा भी नहीं रखती.

सरकार ने बताया कि 2018 से हाई कोर्ट जज के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों से उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि का विवरण मांगा जा रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 28 नवंबर 2025 के बीच कुल 841 जज नियुक्त हुए, जिनमें 32 SC, 17 ST, 103 OBC, 46 अल्पसंख्यक समुदायों से और 129 महिलाएँ शामिल हैं.

लोकसभा में क्या बोले मंत्री रामदास अठावले?

केंद्रीय मंत्री अठावले ने बताया कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की जिम्मेदारी मुख्य न्यायाधीश की होती है, जबकि हाई कोर्ट के जजों के प्रस्ताव संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भेजते हैं.

सरकार ने कहा कि वह न्यायपालिका में सामाजिक विविधता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक समुदायों और महिलाओं के योग्य उम्मीदवारों पर उचित विचार करने का आग्रह करती रही है. अंततः सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में नियुक्ति केवल उन्हीं व्यक्तियों की होती है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अनुशंसित करता है.

विपक्ष की ओर से उठाए गए थे सवाल

हाल फिलहाल में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए आरक्षण के प्रावधान को लेकर विपक्ष की ओर से कई सवाल उठाए गए थे. जिसके बाद अब सरकार ने साफ कर दिया है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजो की नियुक्ति के लिए संविधान में किसी भी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है.

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत कथित अपराध के लिए कुछ आरोपियों के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही सोमवार को रद्द कर दिया और कहा कि शिकायतकर्ता के घर को सार्वजनिक स्थल नहीं माना जा सकता. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत कथित अपराधों के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.