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पाकिस्तानी पत्नी और भारतीय पति का कानूनी संघर्ष! MP हाई कोर्ट में लगाई गुहार, जानें कौन सी अनुमति के लिए अदालत पहुंचे पति-पत्नी

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पाकिस्तानी बीवी और भारतीय पति के वैवाहिक विवाद का मामला अब मध्य प्रदेश की हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. पाकिस्तान के कराची शहर में रहने वाली निकिता नाम की महिला ने अपने भारतीय मूल के पति विक्रम नागदेव के खिलाफ एमपी हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है. निकिता का दावा है कि उसके पति ने न केवल उससे विवाह करके उसे ठगा, बल्कि अवैध तरीके से भारत में रहते हुए दूसरी शादी की तैयारी भी कर रहा है. मामला इतना संवेदनशील हो गया है कि केंद्र सरकार ने भी इस पर नजर रखना शुरू कर दिया है.

निकिता के अनुसार उसका विवाह 26 जनवरी 2020 को कराची में विक्रम से हुआ था. विवाह के समय विक्रम पाकिस्तान में रह रहा था और उसके पास लॉन्ग टर्म वीज़ा था जिसके आधार पर वह बाद में भारत के इंदौर में रहने लगा. शादी के बाद कुछ महीनों तक दोनों साथ रहे और विक्रम उसे भारत भी लेकर आया लेकिन निकिता का कहना है कि थोड़े समय बाद ही उसे जबरन पाकिस्तान वापस भेज दिया गया. उसके अनुसार विदाई के बाद से ही विक्रम का व्यवहार बदल गया और वह उसके संपर्क से दूरी बनाने लगा.

याचिका में और क्या?

निकिता ने इंदौर हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि उसकी शादी अभी भी वैधानिक रूप से कायम है दोनों के बीच न तो तलाक हुआ है और न ही किसी तरह का विवाह विच्छेद. इसके बावजूद विक्रम ने दिल्ली की एक युवती से सगाई कर ली है. निकिता के अनुसार यह सीधे-सीधे आपराधिक प्रवृत्ति, छल और धोखाधड़ी का मामला है जिसका उद्देश्य उसे अपनी जिंदगी से हटाकर भारत में दूसरी शादी करना है. निकिता की ओर से यह याचिका एडवोकेट दिनेश रावत द्वारा दायर की गई है.

निकिता ने अपने विवाह प्रमाणपत्र को पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया है. इस दस्तावेज को पाकिस्तान सरकार ने जारी किया है जिसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि 20 जनवरी 2020 को दोनों की शादी हुई थी और दोनों को पाकिस्तानी नागरिक के रूप में दर्ज किया गया. निकिता का तर्क है कि ऐसे में विक्रम का भारत में आकर दूसरी शादी की योजना बनाना कानून का स्पष्ट उल्लंघन है.

गृह मंत्रालय की भी नजर

उधर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस मामले को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने अनाम रहते हुए बताया कि विक्रम नागदेव के सभी दस्तावेजों और गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है. भारत में रहते हुए उसने किन-किन नामों से और किन परिस्थितियों में संपत्तियां खरीदीं यह सब विभाग की जांच के दायरे में है. मंत्रालय ने जिला प्रशासन से भी उन शिकायतों की प्रतियां मांगी हैं जिनमें आरोप लगाया गया था कि विक्रम गलत दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहा है और संपत्तियों का अधिग्रहण कर रहा है.

सिंधी पंचायत द्वारा भेजी गई शिकायत में यह भी कहा गया था कि विक्रम ने अपने भारतीय पहचान पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कागज़ गलत तरीके से तैयार करवाए हैं. अब जब यह शिकायत गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में शामिल हो गई है तो यह मामला केवल पारिवारिक विवाद न रहकर कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं तक पहुंच गया है. मंत्रालय इस संभावना की भी जांच कर रहा है कि विक्रम ने किस प्रकार से पाकिस्तान और भारत दोनों जगह अपनी पहचान और दस्तावेजों का उपयोग किया.

निकिता का कहना है कि शादी के तीन महीनों के भीतर ही ससुराल पक्ष ने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और दबाव बनाकर वापस भेज दिया. उसके अनुसार, यह सब विक्रम के लिए किसी दूसरी महिला से शादी का रास्ता साफ करने की साजिश के तहत किया गया. हाई कोर्ट में उसने मांग की है कि विक्रम को तत्काल पाकिस्तान भेजने का निर्देश दिया जाए ताकि वह किसी और को धोखा न दे सके और विवाह संबंधी कानूनों का उल्लंघन बंद हो. अदालत अब पूरे मामले का परीक्षण कर रही है. जबकि केंद्र और राज्य एजेंसियां विक्रम से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता खंगालने में जुटी हैं.

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