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झारखंड के जेलों में मैनपावर बढ़ाने की कवायद शुरू, सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे थे सवाल

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रांची: झारखंड के तमाम जेल मैनपावर की कमी से जूझ रहे हैं. झारखंड के विभिन्न जिलों में 18000 से ज्यादा कैदी बंद हैं, लेकिन मैनपावर की कमी की वजह से जेलों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. मैनपावर की घोर कमी को देखते हुए बहाली की प्रक्रिया को तेज करने की कवायद शुरू की गई है.

जेलों में मैनपावर की वर्तमान स्थिति

झारखंड सरकार के गृह विभाग के आंकड़ों के अनुसार झारखंड के विभिन्न जेलों में स्वीकृत बल की तुलना में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या चिंताजनक है. गृह विभाग से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड के जेलों में अधिकांश पद रिक्त हैं. जिससे न केवल जेलों का सुचारु संचालन प्रभावित हो रहा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

कितना बल चाहिए और अभी क्या है स्थिति

  • आंकड़े बताते हैं कि झारखंड के विभिन्न जेलों में 1699 पुरुष कर्मचारियों के लिए स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 46 पदों पर ही पुरुष जेलकर्मी कार्यरत हैं.
  • झारखंड के विभिन्न जेलों में स्वीकृत महिला कक्षपालों की संख्या 104 है, लेकिन उनमें से 80 पद अभी भी रिक्त हैं.
  • जेल आईजी के लिए छह स्वीकृत पद हैं, लेकिन सारे रिक्त हैं.
  • तकनीकी नर्स स्टाफ के 51 पद रिक्त हैं.

सबसे ज्यादा कक्षपाल की कमी

आंकड़े बताते हैं कि सबसे गंभीर कमी कक्षपालों की है. जबकि जेल की आंतरिक सुरक्षा, गश्ती और पूरी व्यवस्था कक्षपालों के ही जिम्मे होती है. कक्षपालों के लिए स्वीकृत पदों में 90% पद रिक्त हैं. इस तरह झारखंड में 6 जेलों में आईजी के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद रिक्त हैं. आंकड़े बताते हैं कि उच्च और मध्य स्तरीय पदों पर भी स्थिति चिंताजनक है. कारा डॉक्टरों के 43 स्वीकृत पदों में से मात्र एक ही कार्यरत हैं, यानी डॉक्टर के 42 पद रिक्त हैं. जेलर के 31 पदों के मुकाबले केवल पांच काम कर रहे हैं, यानी 26 पद खाली हैं . यहां तक की जेल अधीक्षक के 21 स्वीकृत पद हैं, लेकिन मात्र 17 कार्यरत हैं. वहीं प्रोबेशन पदाधिकारी के 46 स्वीकृत पद हैं. जिसमें 36 ही कार्यरत हैं. आंकड़े बताते हैं कि सभी महत्वपूर्ण पदों पर रिक्तियां चिंताजनक स्थिति पर पहुंच चुकी हैं.

जेलों में 18 हजार से ज्यादा कैदी

झारखंड में कुल 31 जेल हैं. जिनमें से सात सेंट्रल जेल , 16 जिला जेल और सात उपकारा शामिल हैं. इसके अलावा हजारीबाग में एक ओपन जेल भी है. हजारीबाग स्थित ओपन जेल में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रखा जाता है. सभी सेंट्रल जेल, जिला कारा और उपकारा में मैनपावर की भारी कमी है. जबकि इन जेलों में 18000 से ज्यादा कैदी बंद हैं. स्थिति यह है कि मैनपावर की घोर कमी के कारण जेलों की सुरक्षा सवालों को घेरे में है. हाल ये है कि जेल कर्मचारियों की कमी के चलते अनियमितता के आरोप में निलंबित कर्मियों और अफसरों को भी जल्द निलंबन मुक्त कर उनसे कार्य लेना पड़ रहा है.

क्या कर रहा है जेल प्रशासन

जेलों में मैनपावर की भारी कमी को देखते हुए कारा विभाग के द्वारा रिक्त पदों को भरने के लिए कार्रवाई शुरू की गई है. झारखंड के आईजी जेल सुदर्शन मंडल ने बताया कि होम सेक्रेटरी के लेवल पर एक मीटिंग कर जेलों में मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने का निर्णय लिया गया है. जेल आईजी के अनुसार असिस्टेंट जेलर और कक्षपाल का ऑनलाइन फार्म भरने की तिथि एक दिसंबर तक थी. 8 दिसंबर तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. आईजी जेल ने बताया कि मॉडर्न जेल मैनुअल के आधार पर अतिरिक्त पदों का सृजन भी किया जा रहा है.

विभाग को भेजा गया प्रस्ताव

जेल आईजी के अनुसार पुरुष कक्षपालों के 1653 और महिला कक्षपालों के 80 पदों पर सीधी नियुक्ति के लिए रोस्टर क्लियरेंस का प्रस्ताव गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है. इसके साथ ही एक्स-रे टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और नर्स जैसे स्टाफ के 51 पदों पर सीधी नियुक्ति के लिए भी रोस्टर क्लीयरेंस का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है. वहीं जेल के प्रशासनिक पदों की बात करें तो झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से अधीक्षक के दो और प्रोबेशन पदाधिकारी के 6 पदों पर नियुक्ति के लिए चयन किया जा चुका है.

हाई सिक्योरिटी जेलों के लिए अलग प्रस्ताव

जेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड के जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मंडल कारा साक्षी, उपकार मधुपुर और चक्रधरपुर तथा हजारीबाग में बन रहे हाई सिक्योरिटी जेल के संचालन के लिए नए पदों का सृजन का प्रस्ताव भी भेजा गया है.

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