जालंधर/चंडीगढ़: जालंधर शहर में मासूम नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे पंजाब को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को लेकर संत समाज ने गहरी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त किया है। संत श्री अनंतगुरु ॐ वरुण अन्तःकरण जी ने समाज में बढ़ रही ऐसी घटनाओं को “मानसिक अस्थिरता और कमजोर होते संस्कारों का परिणाम” बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब संतों और ऋषियों की वह पवित्र धरा है, जहां किसी के प्रति बुरे विचार रखना भी अनुचित माना जाता है। जालंधर तो स्वयं आदि शक्ति मां त्रिपुरमालिनी का निवास स्थान है, ऐसे स्थान पर इस तरह की घटना होना समाज के गिरते चरित्र का प्रतीक है।
“ध्यान और आत्मनियंत्रण की कमी बढ़ा रही अपराध की मानसिकता”
संत वरुण अन्तःकरण जी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अपने मन पर नियंत्रण नहीं है तो उसे समय रहते उपचार और ध्यान का सहारा लेना चाहिए।
उन्होंने चेताया कि मन में अपराध जैसे विचारों को पनपने ही नहीं देना चाहिए। संत ने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले 15–18 महीनों में बच्चियों के घर से भागने, विवाहेतर संबंध बढ़ने, चरित्रहीनता और नाबालिगों के प्रति अपराध जैसी घटनाएं समाज की टूटती मानसिकता को दर्शाती हैं।
“पाखंड और गलत आस्थाओं ने समाज को भ्रमित किया”
उन्होंने कहा कि बच्चों को सही ज्ञान की जगह भ्रमित करने वाले पाखंडी व्यक्तियों की तस्वीरें देकर पूजा कराना समाज को भटकाने जैसा है। “प्रेत पूजा से धन तो मिल सकता है, पर ज्ञान, स्थिरता और संस्कार केवल ईश्वर भक्ति और सच्चे धर्माचार से मिलते हैं।
प्रशासन पर भी उठे सवाल
घटना की जांच को लेकर प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए संत समुदाय ने कहा कि यदि जांच में लापरवाही या पक्षपात हुआ है, तो यह समाज के विश्वास को कमजोर करता है। उन्होंने मांग की कि दोषियों को कठोरतम सजा मिले ताकि भविष्य में कोई ऐसी घिनौनी हरकत करने की सोच भी न सके।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.