जबलपुर : एक ओर जहां मतदाता सूची गहन पुर्ननिरीक्षण कार्यक्रम (SIR) में काम में लगे बीएलओ प्रेशर व टेंशन में जान गंवा रहे हैं, कई बीएलओ अस्पताल में भर्ती हैं तो वहीं जबलपुर के पनागर में अलग ही तस्वीर दिखाई दी. SIR में नंबर वन आने पर एक सुपरवाइजर को हेलीकॉप्टर में घूमने का पुरस्कार मिला. जबलपुर के एक ब्लॉक की महिला सुपरवाइजर ने सबसे पहले अपना काम पूरा किया. इसलिए निर्वाचन आयोग की ओर से उन्हें जबलपुर से कान्हा और बांधवगढ़ तक हेलीकॉप्टर से घुमाया गया.
स्नेहलता पटेल को मिली थी 10 बूथों की जिम्मेदारी
स्नेहलता पटेल महिला बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर हैं. वह जबलपुर के पनागर क्षेत्र में कार्यरत हैं. स्नेहलता पटेल को पनागर विधानसभा की बूथ क्रमांक 52 से लेकर 61 तक मतदाता सूची के गहन पुर्ननिरीक्षण का काम सौंपा गया था. पनागर विधानसभा सीट के इन 10 बूथों में 7706 मतदाताओं की जानकारी को अपडेट करना था. स्नेहलता जबलपुर की ऐसी पहली सुपरवाइजर हैं, जिसने यह काम सबसे पहले खत्म किया.
टारगेट पूरा करने पर हेलीकॉप्टर से सफर
सामान्य तौर पर सरकारी टारगेट पूरा करने पर कोई बहुत प्रोत्साहन नहीं मिलता लेकिन स्नेहलता इस मामले में भाग्यशाली हैं. उन्हें अपना टारगेट सबसे पहले पूरा करने में शासन की ओर से हवाई सफर का पुरस्कार मिला. शासन के खर्चे पर स्नेहलता ने पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा से कान्हा और बांधवगढ़ की जॉय राइड की. स्नेहलता का कहना है “उन्हें उम्मीद नहीं थी कि अपने काम को सबसे पहले पूरा करने में ऐसा पुरस्कार मिलेगा.”
जबलपुर में 73 फीसदी फॉर्म का डिजिटाइजेशन
जबलपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में मतदाताओं से प्राप्त गणना प्रपत्रों में से 73.34 प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है. जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 19 लाख 25 हजार 472 है. इनमें से अभी तक 14 लाख 12 हजार 151 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है. जबलपुर की पाटन विधानसभा सीट में 86.50 प्रतिशत गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ जिले की आठों विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर है.
जबलपुर की पूर्व विधानसभा सीट पर रफ्तार धीमी
जबलपुर की पूर्व विधानसभा सीट में काम सबसे कठिन है. इसलिए यहां अभी मात्र 59 प्रतिशत गणना पत्र का डिजिटाइजेशन हो पाया है. एसआईआर का काम तेजी से चल रहा है लेकिन इसमें भी कुछ अधिकारी लापरवाही कर रहे हैं. जबलपुर में एक मामला ऐसा भी सामने आया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने लोगों के नाम दर्ज करने पर आपत्ति दर्ज करवाई लेकिन प्रशासन ने ऐसा करने से मना कर दिया. नेताओं का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कत 2003 की मतदाता सूची मिलने में हो रही है. निर्वाचन आयोग को इसे सभी को उपलब्ध करवाना चाहिए.
मध्य प्रदेश में 7 बीएलओ की मौत, कई अस्पताल में
मध्य प्रदेश में एसआईआर के काम में लगे बीएलओ मौत का शिकार हो रहे हैं. किसी को हार्ट अटैक तो किसी को ब्रेन हेमरेज हो रहा है तो कोई खुद ही मौत को गले लगा रहा है. मध्य प्रदेश में 20 दिन के अंदर 7 बीएलओ मौत का शिकार हुए हैं. कई बीएलओ तबियत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती हैं.
मध्य प्रदेश में बीएलओ की मौतों पर एक नजर
- शहडोल जिले के सोहागपुर में बीएलओ मनीराम नापित (54) की हार्ट अटैक से मौत.
- नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में एसआईआर का काम करके घर लौट रहे शिक्षक सुजान सिंह रघुवंशी की ट्रेन की चपेट में आने से मौत.
- भोपाल से सटे मंडीदीप में बीएलओ रमाकांत पांडे का हार्ट अटैक से निधन.
- झाबुआ जिले में बीएलओ भुवान सिंह चौहान को हार्ट अटैक, मौत. जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था. परिजनों का आरोप है कि तनाव की वजह से उनकी मौत हुई.
- दमोह में बीएलओ सीताराम गोंड की तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. जबलपुर रेफर. इलाज के दौरान मौत.
- बालाघाट बीएलओ अनीता नागेश्वर (50) की नागपुर में मौत. उन्हें गोंदिया में भर्ती कराया गया था, फिर नागपुर रेफर किया गया.
- रीवा की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वीणा मिश्रा (55) की सीधी जिले के रामपुर नैकिन में हार्ट अटैक से मौत.
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