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मुस्लिम छात्रों को बड़ी राहत! NMC ने ठुकराई यूनिवर्सिटी की मांग, माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में विवाद खत्म

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नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कटरा के माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के उस प्रपोज़ल को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी की इंस्टीट्यूट की 100 फीसद MBBS सीटों को ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत रखा जाए, जिन्हें मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के जरिए भरा जाएगा.

NMC के मुताबिक इस तरह के कदम मौजूदा पॉलिसी के खिलाफ है. नेशनल मेडिकल कमीशन के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया, “हम MCC में 100 फीसद सीटें किसी अकेले इंस्टीट्यूट को नहीं दे सकते, क्योंकि सरकार की पॉलिसी है कि इतने परसेंट सीटें मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) को जाती हैं और इतने परसेंट सीटें स्टेट काउंसलिंग को जाती हैं.”

बता दें, इस साल कॉलेज को 50 सीट पर MBBS की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति मिली थी. जिसके बाद NEET के एग्जाम के जरिए मेरिट पर 42 मुस्लिम छात्रों को इसमें एडमिशन मिला. मुस्लिम छात्रों के एडमिशन के बाद हिंदू संगठन और बीजेपी भड़क गई और इन एडमिशन का विरोध शुरू हुआ.

नेशनल मेडिकल कमीशन ने दिया ये तर्क

NMC अधिकारी ने आगे कहा, “हम अकेले या रैंडम तरीके से किसी एक ऑर्गनाइजेशन से अलग नहीं हो सकते. अगर हमें खास तौर पर इस ऑर्गेनाइजेशन के लिए यह जारी करना है, तो इसमें बदलाव की जरूरत है. जब हम पॉलिसी में बदलाव करते हैं, तो हमें मिलते-जुलते इंस्टीट्यूशन को ध्यान में रखना होता है. अगर पॉलिसी या परसेंटेज में कोई बदलाव होता है, तो इंस्टीट्यूशन एडमिशन के नियमों में बदलाव कर सकता है.” अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी क्राइटेरिया सभी राज्यों में एक जैसा होना चाहिए.

एडमिशन का क्यों हो रहा विरोध?

विरोध करने वाले हिंदू संगठन और बीजेपी का कहना है कि क्योंकि इंस्टीट्यूट को माता वैष्णो देवी के भक्तों से फंड मिलता है, इसलिए इसमें ज्यादा दाखिले हिंदू छात्रों के होने चाहिए. जबकि कई लोगों ने इस मांग विरोध किया है और कहा है कि छात्रों का एडमिशन मेरिट बेस पर है और देश में और ऐसे कई इंस्टीट्यूशन हैं जो धार्मिक ट्रस्ट या पैसे से चलते हैं, लेकिन छात्रों का एडमिशन मेरिट के आधार पर होता है.

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