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वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी! प्रयागराज में एक मकान में 302 लोगों के नाम दर्ज, BLO हैरान, क्या है इसके पीछे का राज?

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इस समय देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभियान चल रहा है. बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन कर रहा है और 2002 से 2004 (उदाहरण के लिए 2003) की पुरानी वोटर लिस्ट से नामों का मिलान कर रहा है. उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया चल रही है. इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने BLO को भी हैरान और परेशान कर दिया.

दरअसल, प्रयागराज विधानसभा क्षेत्र, इलाहाबाद उत्तर भाग संख्या 269 में मकान नंबर में रहने वाले लोगों की संख्या 2003 की वोटर लिस्ट में सैकड़ों में मिली. एक परिवार में ज्यादा से 6 या 7 लोग या फिर अगर संयुक्त परिवार हो तो 15 से 20 लोग रहते होंगे, लेकिन 2003 की वोटर लिस्ट में एक-एक घर में सैकड़ों-सैकड़ों लोग रहते हैं. इलाहाबाद उत्तर विधानसभा क्षेत्र भाग संख्या 269, मकान नंबर 7 में 302 वोह तो वहीं इलाहाबाद उत्तर विधानसभा क्षेत्र की भाग संख्या 271 के मकान नंबर 27 में 131 लोग रहते हैं.

BLO कर रहे लोगों की तलाश

ये लिस्ट अब BLO को परेशान कर रही है और BLO इन लोगों की तलाश कर रहा है. वोटर लिस्ट के SIR के दौरान लोगों को अलग-अलग फॉर्म दिए गए हैं. अब इन फॉर्म में भरी गई जानकारी का मिलान साल 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट से किया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि व्यक्ति या उसके परिवार का नाम पहले से उस लिस्ट में दर्ज था या नहीं. इससे पहले SIR 2002 से 2004 के बीच किया गया था.

अब 22 साल में शहर का दायरा काफी बदल गया है, साथ ही पोलिंग बूथों में भी बदलाव हो गया. पहले जहां छोटे मकान थे. वहां अब अपार्टमेंट बन गए हैं. अब सवाल ये है कि उस वक्त की लिस्ट कितनी सही थी. मकान नंबर की जगह झुग्गी झोपड़ी डाल दिया गया है और इसमें 518 लोग रहते हैं. BLO ने कहा कि ये तो समझ आता है कि गरीब इंसान के पास मकान नहीं था, इसलिए झुग्गी झोपड़ी डाल दिया गया, लेकिन एक झुग्गी-झोपड़ी में इतने लोग नहीं हैं, जितने लिखे हुए हैं. अब किसी भी क्षेत्र में लोगों को ढूढ़ना मुश्किल हो रहा है. एक मकान नंबर हनुमान तो एक पर बजरंग लिखा हुआ है. इन मकान नंबरों में 50 से 100 लोग रह रहे हैं.

जिलाधिकारी ने दिए ये निर्देश

प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने वोटर लिस्ट के SIR को लेकर निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (electoral registration officer) सहायक निर्वाचन अधिकारी (assistant election officer) अधिकारियों के साथ एक मीटिंग कीउन्होंने निर्देश दिया कि सिर्फ बीएलओ पर निर्भर न रहें. डीएम ने सभी सुपरवाइजरों को खुद बूथों पर जाकर हालात देखने और बीएलओ की परेशानियों का तुरंत हल कराने के निर्देश दिए.

गणना प्रपत्र जमा करने की आखिरी तारीख बी नजदीक है, लेकिन अब तक लगभग आधे प्रपत्र भी डिजिटल रूप में दर्ज नहीं हो पाए हैं. इस धीमी रफ्तार पर डीएम ने नाराजगी जताई और कहा कि प्रपत्र जमा कराना सिर्फ बीएलओ की जिम्मेदारी नहीं है. अधिकारी सिर्फ आदेश देने तक ही सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर जाकर काम की बाधाओं को दूर करें, ताकि पुनरीक्षण समय पर पूरा हो सके.

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