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किंग कोबरा की सर्जरी! उज्जैन में खुदाई के दौरान हुआ जख्मी, 80 टांके लगाकर बचाई गई जान, वन विभाग की टीम ने किया कमाल

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक घायल सांप की 80 टांके लगाकर जान बचाई गई है. विक्रम नगर इंडस्ट्रियल क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान एक किंग कोबरा गंभीर रूप से घायल हो गया था. जेसीबी की खुदाई के बीच अचानक सांप के आ जाने से उसके फन और शरीर के पिछले हिस्से में गहरी चोटें आईं. घायल अवस्था में सांप रातभर भटकता रहा. सुबह जब लोगों ने उसकी हालत देखी, तो उन्होंने तुरंत सर्प मित्रों को सूचना दी.

जानकारी मिलते ही सर्प मित्र राहुल और मुकुल मौके पर पहुंचे. उन्होंने काफी सावधानी से सांप को रेस्क्यू किया और उदयन मार्ग स्थित पशु चिकित्सालय ले गए. पशु चिकित्सक डॉक्टर मुकेश जैन ने सांप की गंभीर अवस्था को देखते हुए तुरंत उपचार शुरू किया. दो घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टर ने सांप के फन और पीठ के हिस्सों पर लगभग 80 टांके लगाए. टीमवर्क और सतर्कता के चलते सांप का जीवन बचाने में सफलता मिली.

ऑपरेशन के बाद सांप को सर्प मित्रों को सौंपा गया

ऑपरेशन पूरा होने के बाद सांप को सर्प मित्रों को ही सौंप दिया गया, जो अब उसके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं. लोग डॉक्टरों और सर्प मित्रों की मानवता से भरी पहल की सराहना कर रहे हैं. आमतौर पर घायल पक्षियों और अन्य जानवरों की मदद तो की जाती है, लेकिन सांप जैसे खतरनाक जीव के लिए इस स्तर पर प्रयास किया जाना बहुत कम देखने को मिलता है. लोगों का कहना है कि इस घटना ने यह साबित किया है कि जीव चाहे कोई भी हो, मानवता उसी में है कि उसकी जान बचाई जाए.

कोबरा सांप मुख्य रूप से नाजा प्रजाति से आते हैं. दुनिया भर में कोबरा की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कुछ सबसे प्रसिद्ध भारतीय कोबरा और किंग कोबरा हैं. हालांकि किंग कोबरा को अक्सर सामान्य कोबरा समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तव में किंग कोबरा नाजा नहीं, बल्कि ओफिओफैगस प्रजाति से संबंधित होता है. यह दुनिया का सबसे बड़ा विषैला सांप है. इसके विपरीत सामान्य कोबरा इंसानी बस्तियों के आसपास, खासकर कृषि क्षेत्रों में, अधिक देखा जाता है.

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