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मां की मौत के बाद भी SIR के काम में लगी रही BLO नीलू गौड़, इंदौर कलेक्टर ने दी सांत्वना

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इंदौर : मतदाता पुनरीक्षण अभियान (SIR) के काम में लगे बीएलओ जहां दबाव में आकर जान से हाथ धो रहे हैं, ऐसे में इंदौर की बीएलओ नीलू गौड़ की चर्चा चारों ओर हो रही है. इंदौर की नीलू गौड़ प्रदेश की पहली ऐसी बूथ लेवल अधिकारी हैं, जिन्होंने मां की मौत होने के बाद भी बॉडी घर पहुंचने तक SIR के काम को लेकर कर्तव्यनिष्ठा को प्राथमिकता दी, जिनके समर्पण के आगे अब प्रशासन भी नतमस्तक है.

विक्रम अवार्ड विजेता हैं नीलू गौड़

लोकतांत्रिक प्रणाली के प्रति सच्ची निष्ठा, अदम्य साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण कैसा होता है, यह उदाहरण इंदौर जिले की सॉफ्टबॉल खिलाड़ी और विक्रम अवार्ड प्राप्त कुमारी नीलू गौड़ ने पेश किया है. वर्तमान में वे वाणिज्यिक कर कार्यालय इंदौर में सहायक ग्रेड-III के पद पर कार्यरत हैं.

निर्वाचन कार्यों के दौरान उन्हें विधानसभा क्षेत्र क्रमांक इंदौर-5 के अंतर्गत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) का दायित्व सौंपा गया है. जब उन्होंने BLO के रूप में कार्यभार ग्रहण किया, तभी उनकी माताजी कैंसर की अंतिम अवस्था से जूझते हुए इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती थीं.

बड़े संकट के बाद भी एसआईआर का काम जारी रखा

परिवार पर संकट के बादल मंडरा रहे थे, लेकिन नीलू गौड़ ने अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया. दिनभर अपने दायित्वों का निर्वहन और अस्पताल में माताजी की देखभाल दोनों मोर्चों पर वे अदम्य साहस के साथ डटी रहीं. वे सुबह से लेकर रात 9-10 बजे तक लगातार घर-घर जाकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य फॉर्म पहुंचाना, भरवाना, कलेक्ट करना और डिजिटाइजेशन कराना आदि कार्यों में जुटी रहीं. उनकी लगन को देखकर सभी पर्यवेक्षक और वरिष्ठ अधिकारी प्रशंसा करते रहे.

बीएलओ की मां की अस्पताल में मौत

डॉक्टरों ने उन्हें पहले ही सूचित कर दिया था कि उनकी माताजी अंतिम स्टेज पर हैं और किसी भी पल स्थिति गंभीर हो सकती है, परंतु नीलू गौड़ ने इस भावनात्मक पीड़ा को भी अपनी जिम्मेदारी की राह में बाधा नहीं बनने दिया. कैंसर से जूझते हुए अस्पताल में उनकी मां की जब मौत हो गई तो परिवार के लोगों ने इसकी सूचना दी. उस दौरान अवर्णनीय पीड़ा के उस क्षण में भी उनका पहला विचार कर्तव्य था.

नीलू ने कॉल किया तो अफसर भी अवाक

नीलू ने सुबह 6 बजे रोते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर सूचित किया और कहा कि अभी माताजी के पार्थिव शरीर को अस्पताल से लाने में समय लगेगा, तब तक मैं मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के कार्य में लगी रहती हूं. बीएलओ नीलू गौड़ का कहना है “ये काम भी बहुत अहम है. लोकतंत्र और राष्ट्रहित में हर किसी को अपनी जिम्मेदारी तल्लीनता से निभानी चाहिए.”

इंदौर कलेक्टर भी हुए भावुक, बीएलओ से खुद मिले

नीलू की बात सुनकर प्रशासनिक व निर्वाचन विभाग के अधिकारी भावुक हो उठे. मातृ-वियोग की पीड़ा के बीच भी अपने दायित्व को सर्वोपरि रखना नीलू गौड़ के अद्भुत संकल्प और श्रद्धा को दर्शाता है. आज तक वे 540 से अधिक मतदाताओं के घरों तक फॉर्म पहुंचा चुकी हैं और लगभग 125 से अधिक फॉर्म कलेक्ट कर डिजिटाइज़ भी कर चुकी हैं. यह उपलब्धि किसी भी बूथ लेवल अधिकारी के लिए उल्लेखनीय और प्रेरणादायक है.

इस बारे में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है “ऐसे बीएलओ को वह नमन करते हैं. हमने खुद उनसे मिलकर हौसला बढ़ाया और मां की मौत पर शोक प्रकट कर श्रृद्धांजलि दी.”

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