Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jabalpur-Bhopal NH-45 Toll News: जबलपुर-भोपाल हाईवे पर शाहपुरा टोल टैक्स वसूली पर रोक; नितिन गडकरी न... Nitin Gadkari Bhopal Visit: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का सख्त रुख; RTO में भ्रष्टाचार पर बोले— 'गा... Mandla CMO Bribe Trap: मंडला में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई; 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़... Rajasthan Mayor Election Results: राजस्थान के नगर निगमों में बीजेपी का ऐतिहासिक परचम; जयपुर, जोधपुर ... UP Assembly Election Prep: टिकट के लिए अब दिल्ली-लखनऊ में लॉबिंग नहीं चलेगी, जिलों से तैयार होगी उम्... UP International Trade Show Greater Noida: 85 देशों के खरीदार होंगे शामिल, जानिए यूपी इंटरनेशनल ट्रे... SIR Process Controversy India: चुनाव आयोग पर उठे सवालों के बाद सड़कों पर उतरी कांग्रेस, CEC ज्ञानेश ... Babulal Marandi on SIR Process: एसआईआर देश हित में; नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का विपक्ष पर तंज, ... Pakur Police Action: पाकुड़ के नयाग्राम में 13 साल के दीनानाथ की निर्मम हत्या; एसडीपीओ कुमार गौरव ने... Jharkhand Voter List SIR Dispute: झारखंड में SIR प्रक्रिया को लेकर घमासान; सीजेपी चलाएगी देशव्यापी आ...

अफ्रीका से मध्य प्रदेश के सागर पहुंचेंगे तूफानी चीते, रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का नया आशियाना

25

सागर: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे घर के रूप में तैयार किया जा रहा है. एनटीसीए के चीता प्रोजेक्ट के तहत नौरादेही में चीतों को बसाए जाने के लिए हरी झंडी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन को तैयारियों के लिए बजट भी मिल गया है. यहां पर चीतों के लिए क्वारेंटाइन बाड़ा और सॉफ्ट रिलीज बाड़ा तैयार किए जा रहे हैं. सबसे बड़ा काम जो चीतों के आने के पहले किया जाना है, वो करीब 20 किमी लंबी फेंसिंग का है.

देहरादून के विशेषज्ञों ने दी चीता बसाने की हरी झंडी

बजट मिलने के बाद नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बाड़ा बनाने का काम शुरू कर दिया है. चीता प्रोजेक्ट के भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों के दल ने अप्रैल और मई महीने में तीन दिनों तक पूरे नौरादेही टाइगर रिजर्व का दौरा किया था. इस दौरे के बाद चीतों को बसाने के लिए उन्होंने प्रबंधन को कई तरह के सुझाव दिए थे. जिनमें चीते की सुरक्षा, खाना, पानी के इंतजाम और मानव द्वंद से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया गया था.

सिंहपुर, झापन और मुहली रेंज में बसेंगे चीते

भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने नौरादेही टाइगर रिजर्व का दौरा करने के बाद सागर-दमोह की सीमा के टाइगर रिजर्व के जंगलों को चीतों के लिए उपयुक्त पाया था. यहां सागर की मोहली, सिंगपुर रेंज और दमोह की झापन रेंज के करीब 600 वर्ग किलोमीटर एरिया को उपयुक्त पाया गया है. दमोह में विस्थापन की गति काफी धीमी होने के कारण झापन रेंज में चीतों को बसाया जाना है. यहां मानव और चीतों के बीच द्वंद की आशंका के कारण 20 किलोमीटर लंबी फेंसिंग बनाई जा रही है.

साल 2026 में होगी चीतों की आमद

टाइगर रिजर्व प्रबंधन को करीब 5 करोड़ का बजट मिल चुका है. इस बजट के मिलने के साथ ही फेंसिंग और बाड़ा बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि फेंसिंग और पांच बाड़े तैयार होने के बाद साल 2026 के गर्मी में यहां चीतों को लाया जा सकता है. भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने इसके अलावा जल स्रोत बढ़ाने, ग्रास लैंड विकसित करने और शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाने के लिए कहा है. इस पर भी टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने काम शुरू कर दिया है. जहां-जहां विस्थापन का काम हो रहा है, वहां ग्रास लैंड विकसित किए जा रहे हैं. जिन तीन रेंज में चीतों को बसाने का प्रस्ताव है, वहां जल स्रोत की संख्या भी बढ़ाई जा रही है.नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. एए अंसारी ने बताया, ” हमें तैयारी करने के लिए लगभग पांच करोड़ का बजट मिला है. हम लोगों को जो क्वारेंटाइन बाड़ा बनाना है, उसकी तैयारी कर ली है और चार सॉफ्ट रिलीज बाड़ा बनाना है, उसकी भी तैयारी कर ली है. बाकी बाउंड्री लाइन की फेंसिंग करना है, जिस एरिया में पहले चरण में चीतों को रखा जाना है, वहां पर हम करीब 20 किमी की फेंसिंग कर रहे हैं.”

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.