माउंट आबू में 15 साल का रिकॉर्ड टूटा! नवंबर में पारा 0 डिग्री पर पहुंचा, 4 जिलों में कोल्ड वेव का अलर्ट, पहाड़ों पर बर्फ जमना शुरू
उत्तर भारत में इस बार सर्दी ने सामान्य से काफी पहले दस्तक दे दी है. आमतौर पर दिसंबर में महसूस होने वाली कड़ाके की ठंड इस साल नवंबर की शुरुआत से ही असर दिखाने लगी है. मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2021 के बाद पहली बार उत्तर भारत में तापमान में इतनी तेज गिरावट दर्ज की गई है. विशेष रूप से राजस्थान के कई हिस्सों में पारा अचानक नीचे गिरा, जिससे सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा है.
सोमवार को राजस्थान के 18 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जबकि कई इलाकों में यह 5 डिग्री तक लुढ़क गया. माउंट आबू में सबसे ज्यादा सर्दी का असर देखने को मिला, जहां पारा पहली बार नवंबर महीने में ही शून्य डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि बीते 15 वर्षों में नवंबर में माउंट आबू का तापमान इतनी कम स्तर तक कभी नहीं गिरा था.
फसलों पर जमी बर्फ
सुबह उठे लोगों ने देखा कि फसलों, पौधों, सोलर पैनलों और वाहनों की छतों पर बर्फ जम चुकी थी. सुबह की ठिठुरन इतनी ज्यादा थी कि लोग धूप निकलते ही अपने घरों की छतों और आंगन में बैठकर गर्मी का अहसास लेते नजर आए. बीते 15 वर्षों के तापमान के रिकॉर्ड को देखें तो नवंबर में माउंट आबू का न्यूनतम तापमान कभी भी इतना नीचे नहीं गया.
बीते 15 सालों के क्या हैं आंकड़े?
वर्ष 2022 में तापमान 1 दिसंबर को शून्य तक पहुंचा था, लेकिन नवंबर में यह 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया था. बीते वर्षों के आंकड़े यह बताते हैं कि नवंबर 17 को न्यूनतम तापमान 2024 में 9.4°C, 2023 में 7°C, 2022 में 7°C, 2021 में 5°C, 2020 में 4°C था. उससे पहले 2019 में 10°C, 2018 में 7.4°C, 2017 में 6.6°C, 2016 में 4°C, 2015 में 8°C और 2014 में 9°C दर्ज हुआ था. 2013 और 2010 में भी यह आंकड़ा 10°C के करीब रहा, जबकि 2012 और 2011 में क्रमशः 8°C और 9°C तापमान दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में नवंबर में तापमान का शून्य पर पहुंच जाना असामान्य है और बीते डेढ़ दशक में पहली बार ऐसा हुआ है. उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में हुए पश्चिमी विक्षोभ और तेज उत्तरी हवाओं के कारण अचानक ठंड बढ़ी है. वहीं, सीकर, झुंझनू, चुरू और नागौर जिलों में अगले 7 दिन तक कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया गया है.
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