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600 रेल इंजन में लगना है कवच प्रणाली, अब तक सिर्फ 56 ट्रेनों में लगे

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रायपुर: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर और रायपुर डिवीजन में महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रणाली अब तक पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाई है. 4 नवंबर को बिलासपुर के पास हुए भीषण रेल हादसे के बाद रेलवे की कवच प्रणाली की चर्चा शुरू हो गई है.

कवच प्रणाली से दुर्घटना में आएगी कमी: SECR के तीन डिवीजन बिलासपुर, रायपुर और नागपुर शामिल हैं. इन तीन डिवीजन में 1132 करोड़ रुपए की राशि से रेल इंजन में सुरक्षा कवच लगाया जाना है. जिससे रेल दुर्घटना को रोकने के साथ ही उस पर लगाम लग सके.

कवच प्रणाली क्या है: कवच प्रणाली के लागू हो जाने से दुर्घटना की स्थिति में ट्रेन के इंजन में बैठे लोको पायलट के बगैर ब्रेक दबाए ही ऑटोमेटिक तरीके से ट्रेन रुक जाएगी. अब तक रायपुर डिवीजन में 56 रेल इंजन में कवच प्रणाली लागू हो पाई है. पूरे डिवीजन में 600 रेल इंजन में सुरक्षा कवच प्रणाली लगाई जानी है.

रायपुर रेल मंडल के SDCM अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया “कवच प्रणाली का उद्देश्य सुरक्षित ट्रैवल करना होता है. चाहे वह पैसेंजर ट्रेन हो या फिर मालगाड़ी हो. ट्रेन हादसे रोकने के लिए रेल इंजन में कवच प्रणाली शुरू की जा रही है. इसके लिए ट्रायल का काम भी पूरा किया जा चुका है. इसका पहला ट्रायल दक्षिण भारत में किया गया है. कवच प्रणाली पूरे भारतीय रेल में लगाया जाना है. पैसेंजर और मेल, एक्सप्रेस ट्रेन के साथ ही मालगाड़ी को सुरक्षित करने के लिए कवच प्रणाली लाई गई है.”

तीन चरणों में हो रहा कवच प्रणाली का काम: सीनियर डीसीएम ने बताया “कवच प्रणाली का काम तीन चरणों में किया जा रहा है, जिसमें पहला OFC केबल लाइन बिछाने का काम, दूसरा टावर खड़ा करने का काम, तीसरा दो ट्रेनों और इंजनों के बीच कम्युनिकेशन का काम होता है. ऐसे में इंजनों में कवच प्रणाली इंस्टॉल किया जा रहा है. तीनों पर काम चल रहा है.”

अक्टूबर 2026 तक का टारगेट: रायपुर डिवीजन में केबल लिंक टावर इरेक्शन का काम जनवरी 2026, केबल लिंक मार्च 2026 और कवच प्रणाली सिस्टम का पूरी तरह से अक्टूबर 2026 तक काम पूरा कर लिया जाएगा.

अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया कि रायपुर डिवीजन में रायपुर और भिलाई शामिल हैं. इसमें इलेक्ट्रिक और डीजल इंजन मिलकर 600 इंजनों में कवच प्रणाली शुरू किया जाना है. 173 इंजन में कवच प्रणाली लागू करने का टारगेट है. 56 ट्रेन की इंजन में अब तक कवच प्रणाली लागू की जा चुकी है. बाकी बचे ट्रेन इंजन में मटेरियल सप्लाई के आधार पर इंस्टॉलेशन का काम किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में हुए बड़े रेल हादसे:

01- 4 नवंबर 2025 को बिलासपुर के पास गेवरा रोड बिलासपुर रोड पर चल रही मेमू पैसेंजर ट्रेन खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई. इस दुर्घटना में 11 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से ज्यादा यात्री घायल हुए. प्रारंभिक जांच में सिगनलिंग ओवरशूट को कारण माना गया है. घटना के बाद रेलवे सुरक्षा प्रोटोकॉल पर फिर सवाल उठे.

02- साल 2024 में बिलासपुर लाल खदान हादसा इस हादसे में पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी की आमने-सामने टक्कर हो गई थी. इस दुर्घटना में 7 से 11 यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई थी और कई यात्री घायल भी हुए थे. यह हादसा भी सिग्नल समन्वय की सफलता से जुड़ा हुआ माना गया है.

03- बिलासपुर स्टेशन के पास पैसेंजर और मालगाड़ी दुर्घटना साल 2023 में हुई थी, जिसमें बिलासपुर स्टेशन की सीमा में एक पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतरकर मालगाड़ी से भिड़ गई थी. इसमें पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे. रेलवे जांच में प्वाइंट्स और ट्रैक मैकेनिक एरर की भूमिका सामने आई.

04- साल 2021 में कोरबा सेक्शन मेमू ट्रेन की मालगाड़ी से जोरदार टक्कर हुई थी. ट्रेन का आगे का इंजन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था. घटना में दो से तीन यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 14 यात्री इसमें घायल हुए थे.

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