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बारिश के बाद स्टाप डेम के गेट बंद करना भूला संसाधन विभाग, तेजी से खाली हाे रही सिंध नदी

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शिवपुरी: कोलारस और शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में सिंध नदी के किनारे बसे करीब सवा सौ गांवों के ग्रामीणों को लाभांवित करने के लिए करीब पांच साल पहले सिंध नदी में स्टाप डैम बनवाए गए थे. इन स्टाप डैम के कारण सिंध नदी में वर्ष भर पानी रहता था. नदी में पानी रहने के कारण न सिर्फ मवेशियों को पूरी साल पीने के लिए पानी मुहैया होता है, बल्कि सिंध नदी के दोनों किनारों पर पांच से दस किमी की दूरी तक बसे गांवों में वाटर लेवल मेनटेन होता है.

गेट बंद करना भूला संसाधन विभाग
जल संसाधन विभाग बारिश के मौसम से कुछ समय पूर्व स्टाप डैम के गेटों को खोल देता है और बारिश का मौसम समाप्त हाेते ही इन गेटों को बंद कर दिया जाता है. ताकि न तो गेट और ना स्टाप डैम को नुकसान हो और साल भर नदी में पानी बना रहे. इस बार बारिश का मौसम बीते हुए लंबा समय गुजर चुका है, परंतु अभी तक जल संसाधन विभाग ने स्टाप डेम के गेट नहीं लगाए हैं. इस कारण सिंध नदी का पानी तेजी से बह कर मड़ीखेड़ा डेम में पहुंच रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि, ”अगर सभी स्टाप डैम के गेट बंद नहीं किए गए तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में इस नदी के आसपास के जिन गांवों में वाटर लेवल बना रहता है वहां पर परेशानी की स्थिति निर्मित हो जाएगी. इसके अलावा गर्मी के मौसम में मवेशी पानी के लिए यहां से वहां तड़पते हुए फिरेंगे.”

स्टाप डैम के गेट बंद कराने सौंपा था ज्ञापन
यहां बताना होगा कि कुछ दिन पहले भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने भी कोलारस एसडीएम को विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा था. उस ज्ञापन में किसानों ने सिंध नदी पर बने स्टाप डैम के गेटों को बंद कराने की मांग की थी, ताकि नदी का पानी बहकर मडीखेड़ा डैम तक न पहुंचे. बावजूद इसके इस ओर जल संसाधन विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

ग्रामीणों ने लगाए सांठ गांठ के आरोप
कुछ ग्रामीणों का तो यहां तक आरोप है कि नदी में पानी भरा रहने के कारण नदी में से रेत निकालना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में जो रेत माफिया नदी के विभिन्न घाटों से रेत का खनन कर बाजार में बेच रहे हैं, उन्होंने जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों से सांठ गांठ कर कर गेटों को बंद नहीं होने दिया है. इससे नदी का पानी खत्म हो जाने पर आसानी से रेत का अवैध खनन किया जा सकेगा. ग्रामीणों के अनुसार यही वजह है कि नदी पर बने स्टाप डैम के गेट बंद नहीं किए गए हैं.

जल संसाधन विभाग के इंजीनियर एलएन निमोडिया ने बताया, ”स्टाप डैम के गेट बंद करने का ठेका राजकुमार नाम के व्यक्ति को दिया गया है. वह आज आ गया है, स्टाप डैम में फंसी हुई लकड़ियां, कचरा आदि निकालने के उपरांत जल्द ही दो, तीन दिन में डैम के गेट बंद कर दिए जाएंगे.”

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