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लाइलाज नहीं सोरायसिस, होम्योपैथिक दवाओं से होगा कारगर इलाज, भोपाल में हुई रिसर्च

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भोपाल: सर्दियां बढ़ने के साथ ही स्किन रोग सोरायसिस भी गंभीर रूप दिखाने लगता है. सर्दियों में यह रोग तेजी से बढ़ता है और कई बार गंभीर रूप ले लेता है. लेकिन अब सोरायसिस असाध्य रोग नहीं रहा. होम्योपैथिक दवाएं इस रोग पर बेहद असरकारक साबित हुई हैं. भोपाल के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के एम्स भोपाल के साथ किए गए अध्ययन में इसके बेहतर रिजल्ट सामने आए हैं.

देश में किए गए इस तरह के पहले अध्ययन में सभी मरीजों को होम्योपैथिक दवाओं से बेहतर लाभ मिला है. डॉक्टर्स के मुताबिक किसी भी मरीज में फिर से इस रोग के लक्ष्ण नहीं उभरे. उधर कॉलेज में अब थायरॉयड से बढ़ने वाले मोटापे को लेकर भी अध्ययन शुरू किया गया है.

धीरे-धीरे फैलता जाता है सोरायसिस, एलोपैथी में नहीं है इसका बेहतर इलाज

होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. जूही गुप्ता के मुताबिक सोरायसिस ऑटो इम्यून रोग होता है. इसमें त्वचा पर मोटी और पपड़ीदार परत जमने लगती है. इसमें खुजली होती है और धीरे-धीरे यह फैलती जाती है. यह रोग शरीर के कई हिस्सों में फैलने लगता है. कई बार यह चेहरे और सिर में भी फैल जाता है. आमतौर पर एलोपैथी में इसका इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है, लेकिन एलोपैथी में इसका बेहतर इलाज नहीं है.

इस तरह शुरू हुआ अध्ययन

डॉ. जूही गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथिक दवाएं सोरायसिस रोग में असरकारक रही हैं, लेकिन इसका कोई बायोकैमिकल एनालिसिस नहीं था. इसी वजह से भारत सरकार के होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान की मदद से यह अध्ययन भोपाल एम्स के साथ मिलकर किया गया. इसमें सोसायसिस के गंभीर 60 मरीजों पर होम्योपैथिक दवाओं से इलाज किया. इसमें कई मरीज तो ऐसे थे, जिनके शरीर को इस रोग ने गंभीर रूप से ग्रसित कर लिया था.

मरीज के शरीर पर इस रोग से कई जगह पर निशान हो गए थे, लेकिन होम्योपैथिक दवाओं से मरीज की त्वचा की कंडीशन में धीरे-धीरे सुधार हुआ, बल्कि दूसरी बार फिर यह पैदा नहीं हुआ. इलाज के दौरान किसी भी तरह की रासायनिक दवाओं का उपयोग नहीं किया गया.

दवाओं का किया गया एनालिसिस

अध्ययन के दौरान कुछ मरीज ऐसे भी आए जिनके सिर पर इस रोग के चलते कई घाव हो गए थे. इस वजह से उनके सिर के बाल भी लगातार झड़ते जा रहे थे. ऐसे मरीजों का होम्योपैथिक दवाओं से इलाज किया गया और जिनको करीबन 2 माह में ही आराम मिल गया और उनके सिर पर फिर से बाल उगने शुरू हो गए. अध्ययन के दौरान बायोकैमिकल एनालिसस भी शुरू किया गया. इससे पता करने में मदद मिली कि होम्योपैथिक दवाएं कितनी असरकारक रहीं. इलाज के दौरान किसी भी मरीज को स्टोराइड और कैमिकल युक्त दवाएं नहीं दी गईं.

अध्ययन के बाद शुरू हुआ डीएम कोर्स

डॉक्टर्स के मुताबिक भोपाल के होम्योपैथिक कॉलेज में 60 मरीजों पर यह अध्ययन किया गया. लेकिन बाद में यहां इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 780 तक पहुंच गई है. इन मरीजों का इलाज किया जा रहा है. होम्योपैथिक कॉलेज में किए गए इस अध्ययन के बाद भोपाल के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में इस साल से त्वचा विज्ञान में एमडी कोर्स भी शुरू कर दिया गया है.

थायरॉयड से क्यों बढ़ता है मोटापा, अध्ययन शुरू

उधर भोपाल के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में अब थायरॉयड की वजह से बढ़ने वाले मोटापे को लेकर भी अध्ययन शुरू हो रहा है. कॉलेज के सीईओ डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान के सहयोग से कॉलेज में इसके लिए एक अलग यूनिट शुरू की गई है. इसमें थायरॉयड के मरीजों का होम्योपैथिक दवाओं से इलाज कराया जा रहा है. इस दौरान अध्ययन किया जाएगा कि आखिर ऐसे मरीजों की रिपोर्ट नॉर्मल आने के बाद भी शारीरिक वजन आखिर क्यों बढ़ जाता है और बाद में इसमें कमी क्यों नहीं आती? आमतौर पर ऐसे मरीजों को स्टेराइड दिया जाता है, इसके कई साइड इफेक्ट सामने आते हैं.

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