1990 बैच के आईपीएस झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि सरकार के द्वारा उनके इस्तीफे से संबंधित आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस मुख्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार की देर शाम डीजीपी अनुराग गुप्ता ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री आवास में सौंप दिया.
चर्चा शुरू हो गई है कि डीजीपी अनुराग गुप्ता के इस्तीफा के बाद अब नए डीजीपी के रूप में 1992 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशांत सिंह या 1993 बच के आईपीएस अधिकारी एमएस भाटिया हो सकते हैं. बता दें कि 1990 बैच के आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्ति होने के बाद भी डीजीपी के पद पर बने हुए थे.
चूंकि राज्य सरकार के द्वारा 8 जनवरी 2025 को बने नए नियम के तहत 2 फरवरी 2025 को उनके अगले 2 साल तक के लिए सेवा विस्तार के फैसले पर मुहर लगा दी थी. हालांकि ऑल इंडिया सर्विस रुल के हवाले से केंद्र सरकार ने 22 अप्रैल 2025 को ही उस वक्त की तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र के जरिए यह बतया था कि डीजीपी अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल 2025 को रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में उन्हें एक्सटेंशन नहीं मिलेगा.
पहले प्रभारी डीजीपी
बाद में इसे लेकर के राज्य सरकार के द्वारा भी पत्राचार किया गया और राज्य सरकार के द्वारा यह दलील दी गई की आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता का सेवा विस्तार नियम संगत है. बाद में इस मुद्दे को लेकर आपत्ति जताते हुए झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष सह राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हाई कोर्ट में और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया था. बता दें कि 26 जुलाई 2024 को 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को पहले झारखंड का प्रभारी डीजीपी बनाया गया था.
इसी बीच झारखंड विधानसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग के आदेश पर उन्हें प्रभारी डीजीपी के पद से हटा दिया गया था. पुनः भारी बहुमत से जीत के बाद 28 नवंबर 2024 को हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार गठन होते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें फिर से राज्य का प्रभारी डीजीपी बनाया था.
गैलेंट्री अवार्ड से भी नवाजा गया
आईपीएस अनुराग गुप्ता झारखंड पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने झारखंड के गढ़वा जिला, गिरिडीह जिला, हजारीबाग जिला में एसपी और राजधानी रांची में एसएसपी के पद पर कार्य कर चुके हैं. संयुक्त बिहार में भी आईपीएस अनुराग गुप्ता ने बेहतर कार्य किए थे. उन्हें वीरता के लिए राष्ट्रपति का गैलेंट्री अवार्ड से भी नवाजा गया था.
आईपीएस अनुराग गुप्ता को लगभग 26 महीनों तक निलंबित किया गया था. उन पर वर्ष 2016 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान एक पार्टी विशेष के पक्ष में बड़कागांव की तत्कालीन विधायक को धमकाने और दबाव बनाने का आरोप लगा था. 14 फरवरी 2020 को आईपीएस अनुराग गुप्ता निलंबित हुए थे. हेमंत सोरेन की सरकार ने अप्रैल 2022 में उनका निलंबन रद्द किया था.
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