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बेमेतरा राज्योत्सव: आरु साहू ने बांधा समां, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के शास्त्रीय संगीत ने मोहा मन

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बेमेतरा : छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत जिले के ऐतिहासिक बेसिक स्कूल मैदान में राज्योत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही. छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और संगीत की अनूठी छटा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस अवसर पर प्रदेश की लोकप्रिय लोकगायिका आरु साहू ने अपनी मधुर आवाज और छत्तीसगढ़ी गीतों की धुनों से ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. उनके साथ मंच पर उपस्थित टीम ने लोकवाद्य और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया.

राज्योत्सव में छग के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां: आरु साहू ने “मोला मया दे दे रे मितवा”, “छत्तीसगढ़ हमर मया माटी” जैसे प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शक झूम उठे. उनकी प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की लोक आत्मा और परंपराओं की सुंदर झलक पेश की. कार्यक्रम को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ पहुंची. बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी राज्योत्सव की सांस्कृतिक शाम का आनंद लेने पहुंचे. राज्योत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिला. अलग अलग स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने लोकनृत्य, देशभक्ति गीत और पारंपरिक झांकी प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया. विभागीय स्टॉल में विकास की झलक दिखाते प्रदर्शनों को भी लोगों ने बड़ी रुचि से देखा.

स्कूली बच्चों ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा: शाम 4 बजे से शुरू हुए कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया. कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती शिशु मंदिर नवागढ़ के बच्चों द्वारा ‘जय हो मैया शारदे’ भजन से हुई. जिसके बाद सेजेस बेमेतरा के बच्चों ने ‘जोहार बूढ़ादेव पर छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य प्रस्तुत किया. इसी क्रम में सेजेस नांदघाट ने ‘हाथे डाला लोर गे रे’ गीत पर नृत्य कर तालियां बटोरीं. सरस्वती शिशु मंदिर बेमेतरा के ‘पंथी नृत्य’ और इंडियन पब्लिक स्कूल की ‘बारहमासी त्यौहार (मोर छत्तीसगढ़)’ प्रस्तुति ने राज्य की संस्कृति की झलक बिखेरी. नवोदय विद्यालय ने ‘रिमिक्स छत्तीसगढ़ी गाना’ पर प्रस्तुति दी, वहीं सेजेस ठेलका के छात्रों ने ‘महूआ झरे’ और सेजेस साजा ने ‘आदिवासी करमा नृत्य’ से छत्तीसगढ़ी परंपराओं की सुंदर छवि पेश की. सेजेस सिंघौरी (इंग्लिश मीडियम) की ‘सोनचिरैया’ और सेजेस हसदा के ‘बस्तरिया गीत’ ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया.

खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के शास्त्रीय संगीत ने मोहा मन: शाम 5 बजे सेसनावर खान और द्युति साहू द्वारा मनमोहक कथक प्रस्तुति दी गई, जिसके बाद इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की टीम ने अपनी शानदार प्रस्तुति से राज्योत्सव की शाम को भव्यता प्रदान की. शाम 6 बजे से अतिथियों का स्वागत और प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी वितरण हुआ. उसके बाद शाम 6:10 बजे से मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति आरु साहू द्वारा दी गई, जिनकी मधुर आवाज से पूरा मैदान छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत के रंग में रंग गया. राज्योत्सव महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित इन प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, नृत्य, संगीत और परंपराओं की झलक दिखी. दर्शकों की भारी भीड़ ने हर प्रस्तुति का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का मनोबल बढ़ाया.

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