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नक्सलगढ़ के बच्चों की दीपावली, श्रवण बाधित बच्चों को सिखाया प्रकाश पर्व का महत्व

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दंतेवाड़ा: शासकीय श्रवण बाधित विशेष विद्यालय जावंगा के बच्चों को प्रकाश पर्व यानी दीपावली का महत्व समझाया गया. बच्चों को मिठाई भी दी गई. समाज कल्याण विभाग हर त्यौहार से पहले ऐसे आयोजन करता है. बच्चों को बताया गया कि यह त्योहार अच्छाई पर बुराई की विजय और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है. बच्चों को दीये सजाना, रंगोलियां बनाना और दीपावली गीतों की प्रस्तुति करना भी सीखाया गया.

हर त्यौहार पर विशेष आयोजन: समाज कल्याण अधिकारी संतोष टोप्पो ने बताया कि हम हर त्योहार के पहले बच्चों से मिलते हैं. विशेष आयोजन कर बच्चों को हर त्योहार का महत्व बताते हैं. बच्चों को मिठाई भी देते हैं. बच्चों को बताते हैं कि घर जाकर भी अच्छे से त्यौहार मनाएं ताकि वे अपने माता पिता के साथ त्यौहार मना सकें.

श्रवण बाधित बच्चों के लिए विशेष आवासीय परिसर: दरअसल दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्र के श्रवण बाधित बच्चों के लिए नि:शुल्क आवासीय परिसर संचालित किया जा रहा है. शासकीय श्रवण बाधित विशेष विद्यालय जावंगा में बच्चों को न केवल रहने और पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के हर प्रयास किए जा रहे हैं.

नक्सलगढ़ के बच्चों पर विशेष ध्यान: समाज कल्याण अधिकारी संतोष टोप्पो ने बताया कि दंतेवाड़ा में दिव्यांग और मूक बधिर बच्चे, जो सुन-बोल नहीं सकते उनके लिए जावंगा में विशेष आवासीय विद्यालय संचालित किया जा रहा है. 47 बच्चे यहां पढ़ रहे हैं. शासन की तरफ से बच्चों के रहने, खाने, पढ़ने, स्वास्थ्य, शिक्षा सभी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. यह दंतेवाड़ा के अंदरुनी इलाकों के बच्चे हैं, जिन्हें आवासीय परिसर बनाकर रखा गया है.

47 श्रवण बाधित बच्चों को दी जा रही शिक्षा: समाज कल्याण विभाग के अधिकारी संतोष टोप्पो ने बताया कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में कई कल्याणकारी संस्थाएं संचालित की जा रही हैं. उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि जिले के किसी भी बच्चे को उसकी अक्षमता के कारण शिक्षा या अवसरों से वंचित न रहना पड़े. ये सभी बच्चे जिले के अंदरूनी और नक्सल प्रभावित इलाकों से आते हैं. हमारा प्रयास है कि उनके सपनों को साकार करने में कोई कमी न रहे.”

अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा समय समय पर बच्चों को भ्रमण पर भी ले जाया जाता है ताकि वे बाहरी दुनिया को समझ सकें और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें. उपयुक्त पाठ्यक्रम आवासीय विद्यालय में पढ़ा रहे हैं ताकि नक्सल प्रभावित इलाकों के ये बच्चे आत्मनिर्भर बन सकें.

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