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October चढ़ते ही किसानों पर गिरी बड़ी मुसीबत, टूट सकते हैं सभी Record

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गुरदासपुर: इस साल मानसून के मौसम में रिकॉर्ड बारिश के बाद, सितंबर के आखिरी हफ्ते में जहां भारी गर्मी और तपिश रही, अब अक्टूबर के शुरू होते ही मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है।

धुंध और तापमान में गिरावट
खासकर आज और बीते कल पड़ी धुंध ने मौसम में ठंडक ला दी है, जिससे इस इलाके में तापमान में भी काफी गिरावट आई है। दूसरी ओर, पहले ही बारिश की वजह से धान की फसल को बड़े नुकसान के बाद अब जब खेतों में धान की फसल पककर तैयार हो गई है, मौसम विभाग ने 6 अक्टूबर को मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

धान में नमी और MSP पर असर
पहले से ही मंडियों में आने वाले धान में नमी की मात्रा 20% से अधिक बताई जा रही है, जबकि सरकार ने 17% नमी तक वाले धान को MSP पर खरीदने का एलान किया है। ऐसे में अगर भारी बारिश होती है, तो खेतों की फसल को नुकसान होने के साथ-साथ मंडियों में धान की नमी बढ़ने की वजह से किसानों को सही मूल्य भी नहीं मिल पाएगा, जिससे किसानों को दोहरी चिंता का सामना करना पड़ सकता है।

अक्टूबर में भी टूट सकता है बारिश का रिकॉर्ड:
अगस्त और सितंबर में हुई भारी बारिश ने पिछले करीब ढाई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्यतः अक्टूबर में 1 से 5 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल 6 और 7 अक्टूबर को 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने की संभावना है। इससे न केवल पिछले रिकॉर्ड टूट सकते हैं, बल्कि धान की फसल को भी काफी नुकसान हो सकता है।

तापमान में गिरावट और धुंध का असर:
गुरदासपुर जिले की विभिन्न मंडियों में धान में नमी की मात्रा औसतन 20% तक बताई जा रही है, जबकि सरकार ने इसे 17% तक सीमित रखा है। पहले से ही किसान और किसान संगठनों ने इस पर विरोध जताया है कि उनका धान सूखने के बावजूद फसल को काटा जा रहा है। अब मौसम में ठंडक और बारिश की संभावना बढ़ने से आने वाले दिनों में किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

प्रभावित क्षेत्र और फसल:
गुरदासपुर जिले में लगभग 1.74 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती और धान की खेती की गई है। इनमें से 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान, बासमती और गन्ने की फसल प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में पहले से आर्थिक तंगी झेल रहे किसान अब और परेशान हो सकते हैं।

धान की गुणवत्ता पर असर:
हालांकि इस बार धान की स्थिति काफी अच्छी बताई जा रही है, लेकिन सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार केवल कुछ किसानों का धान ही सही पाया गया है। अगर मौसम में इसी तरह बदलाव और भारी बारिश होती रही, तो धान की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, जिसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा।

डॉक्टरों ने लोगों को किया सचेत
गुरदासपुर और आसपास के क्षेत्रों में अब दिन का तापमान लगभग 27-28 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 18-19 डिग्री सेल्सियस के करीब है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि ठंडा पानी पीने से बचें, एसी का इस्तेमाल करते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें। उन्होंने कहा कि मौसम में यह बदलाव लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए सभी को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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