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पटाखा कारोबारियों के लिए बेहद जरूरी खबर, 1 तारीख को…

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अमृतसर: दीवाली के त्योहार पर पटाखों के अस्थायी खोखे लगाने के लिए लोगों ने आवेदन भरना शुरू कर दिया है, लेकिन जिला प्रशासन की सख्ती के बावजूद इस बार भी पटाखों के खोखे ब्लैक होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में एक्सपलोसिव विभाग की तरफ से 29 लोगों को पटाखों की मैन्यूफैक्चकिंग करने व बिक्री करने के लिए पक्के लाइसेंस जारी किए गए हैं।

लगभग एक दर्जन लाइसेंसी पटाखा कारोबारी अन्य जिलों में भी शिफ्ट हो चुके हैं, लेकिन रैड क्रॉस दफ्तर में सोमवार शाम तक 549 लोगों ने खोखों के आवेदन के लिए पर्ची कटवाई है रैड क्रॉस को इससे लगभग 11 लाख रुपए का दान बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए मिल चुका है, क्योंकि प्रति पर्ची 2 हजार रुपये फीस रखी गई है लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि आखिरकार सैकड़ों की संख्या में आवेदन कौन जमा करवा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस बार भी ऐसे लोग पटाखों के खोखों के लिए आवेदन जमा करवा रहे हैं, जिनका पटाखों के कारोबार के साथ दूर-दूर का भी कोई नाता नहीं है। आपको बता दें कि आज फार्म भरने का आखिरी दिन और 1 को लक्की ड्रॉ निकाला जाएगा।

एक होटल मालिक ने कटवाई 55 पर्चियां

एक होटल मालिक जिसका पटाखा कारोबार के साथ कोई लेना देना नहीं है उसने अपने जान पहचान के लोगों के जरिए 55 पर्चियां कटवाई हैं, ताकि ड्रा के दौरान उसके खोखे निकल आए और वह आसानी के साथ खोखों की ब्लैक कर सके, लेकिन ब्लैक होने से आम जनता को महंगे दाम पर पटाखे खरीदने पड़ते हैं और उनका आर्थिक शोषण होता है।

पिछले वर्ष 2 हजार से ज्यादा आए थे आवेदन

पटाखा खोखों की बात करें तो पिछले वर्ष जिला प्रशासन के पास 2 हजार से ज्यादा लोगों ने पटाखों के लिए आवेदन दिया था, क्योंकि उस समय सिर्फ 100 रुपया फीस रखी गई थी और ब्लैकियों ने अपने जान पहचान के लोगों के जरिए सैकड़ों की संख्या में पर्चियां डाली थीं, लेकिन इस बार बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए रखी गई 2 हजार रुपया फीस के चलते 700 के लगभग पर्चियां आने की संभावना है।

जिसके नाम से खोखा निकले, वही खोखे पर हाजिर होकर बिक्री करे

खोखों के मामले में डी.सी. साक्षी साहनी को पहले ही लिखित रूप से द अमृतसर फायर वर्कर्स एसोसिएशन के प्रधान हरीश धवन की तरफ से शिकायत दी जा चुकी है और अपील की गई है कि खोखों की ब्लैक को रोका जाए और जिस व्यक्ति का लक्की ड्रॉ में नाम निकले उसके दस्तावेज चैक किए जाएं और यह पता लगाया जाए कि क्या वह पटाखों का कारोबार पहले भी करता है या फिर सिर्फ ब्लैक करने के लिए पर्ची डाल रहा है। इतना ही नहीं जिस व्यक्ति का लक्की ड्रॉ में नाम निकले वही खोखे पर बैठकर पटाखों की बिक्री करे और उसके पास जी.एस.टी. नंबर भी होना चाहिए।

पटाखा व्यापारियों को प्रशासन ने नहीं दी स्थायी मार्कीट

पटाखों के मामले में समय समय पर स्थायी पटाखा मार्कीट की मांग को लेकर व्यापारियों की तरफ से माननीय हाईकोर्ट में याचिकाएं डाली जाती रही हैं, जिसमें से एक बार तो अदालत ने प्रशासन को स्थायी मार्कीट देने के आदेश भी प्रशासन को दिए थे। इसके लिए वल्ला पशु मंडी के पास व अन्य कुछ अन्य लोकेशन भी देखी गई थी डीसी रवि भगत को 10 लाख रुपए तक जुर्माना भी हुआ था, लेकिन आसान काम देखते हुए प्रशासन ने दस खोखों के लिए अस्थायी लाइसैंस जारी करने का सिलसिला शुरू कर दिया और अदालत के आदेशों का हवाला दिया गया।

दो महीने पहले सज जाती थी मार्कीट, अब सिर्फ दो दिन

पटाखा मार्कीट की बात करें तो पहले जहाजगढ़ मार्कीट में दीवाली के दो महीने पहले से मार्कीट सज जाती थी, व्यापारी शिवाकासी के पटाखे भारी भरकम टैक्स भरकर खरीदते और बेचते थे, लेकिन आज हालात यह है कि यह मार्कीट सिर्फ दो दिन के लिए न्यू अमृतसर या रणजीत एवेन्यू में लगती है और खोखे ब्लैक होते हैं व आम जनता का आर्थिक शोषण होता है, क्योंकि एक तो ब्लैक की कीमत पूरी करनी है ऊपर से खोखा बनाने के लिए व अन्य फीसें कम से कम एक लाख रुपए में बनती हैं, जिनको नगर सुधार ट्रस्ट व डी.सी.पी. दफ्तर में भरना पड़ता है।

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