ग्लोबल पॉलिटिक्स में यह अवधारणा बहुत फेमस है कि पड़ोसी-पड़ोसी देश एक दूसरे के दोस्त नहीं होते हैं. राष्ट्रहित अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सबसे मूल धारणा मानी जाती है. अभी ऐसा कुछ H-1B वीजा के मामले पर भी देखने को मिल रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो मनमाने ढंग से टैरिफ लगाकर दुनिया की इकोनॉमी को थोड़ा पस्त किया. फिर उन्होंने H-1B वीजा के नए आवेदन का शुल्क बढ़ाकर करीब 88 लाख रुपये कर दिया. चूंकि इसका इस्तेमाल भारतीय करते हैं, तो उन पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है. पहले तो H-1B वीजा से प्रभावित होने वालों के लिए चीन ने अपने दरवाजा खोला और अब मौके की नजाकत को समझते हुए अमेरिका का पड़ोसी मुल्क कनाड़ा भी कामगारों के लिए कुछ ऑफर देने की तैयारी में है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश जल्द ही विदेशी कामगारों को लेने के लिए कुछ प्रस्तावों की घोषणा करेगा, जिनके लिए अमेरिक में काम करने का सपना अब 100,000 डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क के कारण बहुत महंगा हो गया है. कार्नी ने कहा कि अमेरिका में उतने एच1बी वीजा धारकों को वीजा नहीं मिलेगा. ये लोग कुशल हैं और यह कनाडा के लिए एक अवसर है. हम जल्द ही इस पर एक प्रस्ताव लाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि ये लोग उद्यमी हैं और काम के लिए आगे बढ़ने को तैयार हैं.
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