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इस वजह से पति को ‘पालतू चूहा’ कहती थी पत्नी, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, 1 जिद ने करा दिया तलाक

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रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम तलाक मामले में फैसला सुनाते हुए पति की याचिका को सही ठहराया है और पत्नी की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि पत्नी द्वारा पति को ‘पालतू चूहा’ कहकर अपमानित करना और उसे माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। फैसले में फैमिली कोर्ट के आदेश को भी बरकरार रखा गया है। पति को तलाक की मंजूरी दी गई है। साथ ही पत्नी को 5 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता एकमुश्त देने और बेटे के लिए 6,000 रुपये व पत्नी के लिए 1,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश भी जारी किया गया।

मामला रायपुर के दंपत्ति से जुड़ा है, जिनकी शादी 28 जून 2009 को हुई थी। याचिका में पति ने बताया कि पत्नी लगातार उसके माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करती थी और उसे उनके साथ रहने से अलग रहने पर मजबूर करने की जिद करती थी। पत्नी ने पति के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया और जबरन गर्भपात करने की कोशिश भी की। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि भारतीय संस्कृति में संयुक्त परिवार की परंपरा रही है। पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। कोर्ट ने कहा कि लगातार अपमानजनक व्यवहार और अलगाव की जिद ने पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है।

बता दें कि फिलहाल पत्नी एक लाइब्रेरियन हैं जबकि पति छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। यह फैसला पारिवारिक मामलों में मानसिक क्रूरता और संयुक्त परिवार के अधिकारों के मामले में महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

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