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हो गया बड़ा बदलाव, छुट्टियों को लेकर जारी हुए नए Order

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चंडीगढ़ : लंबे समय से काम के दबाव और थकान झेल रहे रेजीडैंट डॉक्टरों के लिए पी.जी.आई. प्रशासन ने राहत भरा ऐलान किया है। निदेशक ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि जूनियर और सीनियर रेजीडैंट्स डॉक्टरों की ड्यूटी घंटों को संतुलित किया जाए, ताकि अनावश्यक मानसिक और शारीरिक बोझ न पड़ सके। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी रेजीडैंट डॉक्टरों को सप्ताह में एक दिन की अनिवार्य छुट्टी दी जाए। इससे न केवल डॉक्टरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। पी.जी.आई. में रेज़ीडैंट्स डॉक्टर कई बार लगातार लंबी शिफ्टों में काम करते हैं, जिसकी वजह से थकान और तनाव जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में इस बदलाव से डॉक्टरों को राहत और प्रेरणा दोनों मिली हैं।

आदेश की कॉपी डीन अकादमिक, सब-डीन, सभी विभागाध्यक्षों, रजिस्ट्रार और रेजीडैंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रधान को भेजी गई है, ताकि सख़्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। रेजीडैंट डॉक्टरों का कहना है कि यह फ़ैसला उनकी पुरानी मांगों में से एक था। अब उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखने के साथ-साथ बेहतर काम करने का अवसर मिलेगा। यह कदम न केवल डॉक्टरों के लिए, बल्कि मरीजों के लिए भी सकारात्मक साबित होगा, क्योंकि आराम करने के बाद डॉक्टर अधिक ध्यान और ऊर्जा के साथ सेवाएँ देने में सक्षम होंगे।

लंबे समय से बदलाव की हो रही थी मांग
पी.जी.आई. की ओर से यह बेहद अहम और ज़रूरी कदम है, जिसकी लंबे समय से मांग की जा रही थी। वास्तव में यह समय की आवश्यकता थी। रेजीडैंट डॉक्टर रोज 12 घंटे या उससे अधिक समय तक लगातार काम करते हैं। इतने लंबे कार्य घंटे न केवल शारीरिक रूप से थकाने वाले होते हैं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी बेहद भारी पड़ते हैं। इसलिए मांग थी कि किसी भी रेजीडैंट से दिन में 12 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम न करवाया जाए। उम्मीद है कि यह नई पहल सभी रेजीडैंट्स को राहत और सहारा देगी। पी.जी.आई. ए.आर.डी. चेयरमैन, डॉ. विष्णु जिन्जा ने कहा कि अनुरोध है कि हर विभागाध्यक्ष यह सुनिश्चित करें कि रेज़िडेंट को अनिवार्य साप्ताहिक छुट्टी मिले। इस पालन के बारे में रिपोर्टें नियमित रूप से डीन के कार्यालय को भेजी जानी चाहिए, ताकि जवाबदेही बनी रहे। यह कदम एक स्वस्थ और मानवीय कार्य-परिसर बनाने की दिशा में शुरुआत साबित होगा, उनके लिए जो दूसरों की देखभाल के लिए जीवन समर्पित करते हैं।

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