Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

सितंबर का महीना, पहाड़ों पर बिछी सफेद चादर, चोराबाड़ी ग्लेशियर पर एवलांच… उत्तराखंड के मौसम के अनेक रंग!

20

उत्तराखंड के केदारनाथ क्षेत्र के चोराबाड़ी ग्लेशियर में गुरुवार को एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत हल्का एवलांच (हिमस्खलन) दर्ज किया गया, जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. रेस्क्यू टीमों को एहतियातन के तौर पर अलर्ट मोड पर रखा गया है. हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई नुकसान नहीं हुआ है और स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है.

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरुवार दोपहर लगभग 2 बजे चोराबाड़ी ग्लेशियर क्षेत्र में एक एवलांच की घटना दर्ज की गई, जो कि मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार एक सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद विशेषज्ञ टीमों को अलर्ट कर दिया गया. टीमें मौके की स्थिति का आकलन कर रही हैं. जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है.

केदारनाथ में हुआ एवलांच

इस प्रकार की प्राकृतिक गतिविधियां हिमालयी क्षेत्रों में सामान्य होती हैं. साथ ही उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक सूचना का प्रसार न करने का आग्रह किया है. आपको बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के बीच पश्चिमी विक्षोभ के व्यापक प्रभाव के कारण पहाड़ों में पारा लुढ़कने लगा है. इस कारण सितंबर की शुरुआत में भी बर्फबारी शुरू हो गई है.

मौसम ने बदला मिजाज

आमतौर पर अक्टूबर मध्य के बाद इस तरह की परिस्थितियां बनती थी, लेकिन इस बार मौसम के बदले मिजाज ने आम लोगों के साथ-साथ वैज्ञानिकों को भी हैरानी में डाल दिया है. पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है. इस मानसूनी सीजन में बारिश के पैटर्न में काफी बदलाव देखा गया. कुछ जिलों में सामान्य से कई गुना ज्यादा, तो कुछ में बहुत कम बारिश रिकॉर्ड की गई. इस कारण, नदी-नाले उफान पर बना हुए हैं. साथ ही कई जगह रूक-रूक कर लैंडस्लाइड भी हो रही है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.