आदमपुर: आदमपुर के कुपुर गांव का एक युवक अपने दो अन्य दोस्तों के साथ हिमाचल प्रदेश स्थित धार्मिक स्थल मणिमहेश दर्शन के लिए गया था। 7 दिन बाद वह मौत के साये से निकलकर सकुशल अपने घर पहुंच गया। गांव कुपुर निवासी सुखविंदर सिंह पुत्र अमृतपाल सिंह कुंदरा ने पंजाब केसरी से बातचीत करते हुए बताया कि वह 21 अगस्त को सुबह साढ़े नौ बजे जालंधर निवासी अपने दोस्त संदीप कुमार और रजिंदर कुमार नंदा के साथ हिमाचल प्रदेश में धार्मिक स्थल मणिमहेश के दर्शन करने गए थे और 22 अगस्त को मंदिर के पास विश्राम कर 23 अगस्त को मणिमहेश के दर्शन किए और वह कार में घर लौट रहे थे, लेकिन वह अभी 12 से 15 किलोमीटर ही नीचे की ओर आए थे। आगे 10 किलोमीटर तक लंबा ट्रैफिक जाम लगा हुआ था। यहां न बिजली थी, न पानी, न ही मोबाइल नेटवर्क।
उन्होंने आगे बताया कि एक तरफ नदी बह रही थी, दूसरी तरफ पहाड़ टूटने के कारण दोनों तरफ आने-जाने वाले मुख्य रास्ते बंद हो गए थे। रास्ते पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे, इसलिए वह अपने दोस्त संदीप कुमार की कार नंबर पीबी10 एचसी 4858 व दोनों दोस्तों को सुरक्षित स्थान पर छोड़कर वह बाढ़ के पानी और खतरनाक जंगलों से टूटी सड़कों से होते हुए 8 से 10 घंटे पैदल चल, 65 किलोमीटर लंबा सफर तय किया और किसी तरह चंबे पहुंचा। मोबाइल नेटवर्क आने पर उसने अपने दोस्त बूटा सिंह मैनेजर आदमपुर आयल स्टोर से संपर्क किया, जो अपने साथियों भूपिंदर सिंह भिंदा सरपंच कोहजा, कुलवंत सिंह पंच महदीपुर, संदीप कुमार झल्ली पंच कोहजा, अमरिंदर सिंह राय कोहजा और साबा कोटला के साथ चंबे पहुंचा और उसे मौत के साये से वापस घर लेकर आया। कुंद्रा ने बताया कि करीब 15 से 20 हजार गाड़ी, स्कूटर और मोटरसाइकिल सवार वहां फंसे हुए हैं, जिनमें से कुछ लोग दूसरे राज्यों से हैं, बाकी सभी पंजाबी हैं। उन्होंने हिमाचल के लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने मुसीबत में उनकी बहुत मदद की। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कोई भी हिमाचल की तरफ न जाए। वहां हालात बहुत खराब हैं। खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए घर पर ही रहें। वग और उसका दोस्त मौत के साये में बड़ी मुश्किल से अपने परिवार के पास लौटे हैं।
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