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जिस ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान में मची तबाही, इस दिन तय हुआ था उसका समय

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भारतीय वायुसेना के डिप्टी चीफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने शनिवार को बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत कार्रवाई की योजना 5 मई को ही बन गई थी. पहलगाम आतंकी हमले के 48 घंटे के भीतर यानी 24 अप्रैल को सरकार के सामने एक्शन प्लान पेश कर दिया गया था. 29 अप्रैल को टारगेट तय कर लिए गए थे. 7 मई से ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, 10 मई तक भारत ने पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकाने तबाह कर दिए और 100 आतंकी मार गिराए. आर्मी ने 13 पाकिस्तानी एयरबेस और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया.

नर्मदेश्वर तिवारी ने आगे कहा कि हमारे पास उपलब्ध विकल्पों की लिस्ट लंबी थी फिर वो 9 हुए. पहले हमारे प्राथमिक लक्ष्य आतंकी ठिकाने थे जिन्हें हमने सफलतापूर्वक निशाना बनाया. जब प्रतिक्रिया सामने आई तो तब भी हमने केवल सैन्य ठिकानों पर हमला करते हुए संतुलन बनाए रखा. भारत ने 7 मई की सुबह ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की. यह एक्शन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया गया, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी. भारतीय सेना ने पीओके में आतंकी अड्डों और सैन्य ठिकानों पर अटैक किए. युद्धविराम से पहले 7 मई से 10 मई की शाम तक भारतीय सेना ने पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए. 13 पाकिस्तानी एयरबेस और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.

लक्ष्य, परिणाम और आतंकियों का सफाया

नर्मदेश्वर तिवारी ने बताया कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उन्हें 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी नहीं छुआ गया था. 9 और 10 मई की रात को उनका मुख्य हमला शुरू हुआ तभी हमने निर्णय लिया कि हमें एक संदेश देना होगा. हमने उन्हें सीधे निशाने पर लेकर हमला किया. लंबी दूरी से सटीक हमला करना जरूरी था, लेकिन इसमें काफी जोखिम भी था क्योंकि जितनी ज्यादा दूरी से हथियार दागे जाते हैं उतनी ही नुकसान की आशंका भी बढ़ जाती है, लेकिन मिशन को अंजाम देने वालों की कुशलता के कारण हम लक्ष्य को ध्वस्त करने में सफल रहे और यह भी सुनिश्चित किया कि कोई नुकसान न हो. भारत के जोरदार प्रभाव के बाद वो 10 मई की दोपहर तक बातचीत के लिए तैयार हो गए. ये हमारे लिए उपलब्धि से कम नहीं, 50 से भी कम हथियारों में हमने संघर्ष को खत्म किया.

संतुलन, संदेश और बातचीत की शुरुआत

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने महू में आयोजित रण संवाद सेमिनार में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को यह सीखने की जरूरत है कि संघर्ष को समाप्त कैसे किया जाता है. दुनिया भर में संघर्ष इसलिए वर्षों तक खिंचते रहे हैं क्योंकि उन्हें खुद नहीं पता कि उनका उद्देश्य क्या है. हमारा उद्देश्य एकदम साफ था कि दुश्मन को संदेश देना और जरूरत पड़ने पर सबक सिखाना और सामने से बातचीत की इच्छा जताई गई. अगर हम चाहते तो हमले को आगे बढ़ा सकते थे, लेकिन यह हमारा उद्देश्य नहीं था.

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