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MP में दहेज का काला सच, 18 महीने में 719 हत्याएं, हर दिन एक महिला की मौत

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देश में आज भी दहेज प्रथा एक बड़ी समस्या बनी हुई है. हर रोज देश भर से ऐसे मामले सामने आते हैं जब महिलाओं पर हिंसा की जाती है, केवल और केवल दहेज के लिए. हालांकि सरकार ने इस समस्या के निपटने के लिए भले ही कानून बनाए हैं. इसके बाद भी मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. एनसीआरबी की रिपोर्ट भी कहती है कि देश में हर साल हजारों महिलाओं की मौत की वजह दहेज बना है. इस बीच मध्यप्रदेश के आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया है.

मध्य प्रदेश के आंकड़ों ने सब को परेशान कर दिया है. यहां हर दिन एक महिला की मौत दहेज के कारण हो रही है. ताजा आंकड़ों की बात की जाए तो पिछले 18 महीनों के भीतर 719 महिलाओं की मौत दहेज के कारण ही हुई है.

मध्य प्रदेश में दहेज प्रथा पर कानूनी रोक लगे छह दशक से भी अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद भयावह है. राज्य के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि हर दिन कम से कम एक महिला दहेज उत्पीड़न की शिकार होकर अपनी जान गंवा रही है.

विधानसभा में पेश हुए चौंकाने वाले आंकड़े

29 जुलाई को विधानसभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील के सवाल के लिखित जवाब में ये आंकड़े पेश किए हैं. सरकार की तरफ से बताया गया कि 1531 दिसंबर 2023 21 दहेज हत्याएं दर्ज हुई हैं. वहीं अगर पूरे साल 2024 की बात की जाए तो करीब 459 महिलाओं की मौत की वजह दहेज ही बना है.

जनवरीजून 2025 (सिर्फ 6 महीने के भीतर 239 मौतें हुई हैं. कुल मिलाकर, पिछले 18 महीनों में 719 दहेज हत्याओं का सरकारी रिकॉर्ड सामने आया है.

देशव्यापी आक्रोश की गूंज

ये आंकड़े उस समय सामने आए हैं, जब पूरा देश हाल ही में ग्रेटर नोएडा में 28 वर्षीय निक्की भाटी की दहेज मांग को लेकर जलाकर हत्या किए जाने की घटना से गुस्से में है. ऐसे में मध्यप्रदेश के आंकड़ों ने भी सबको परेशान कर दिया है.

कानून क्या कहता है?

भारतीय कानून में “दहेज हत्या” उन मामलों को कहा जाता है, जब शादी के सात साल के भीतर महिला की असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हो और यह साबित हो कि उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया. दोषी को कम से कम 7 साल की जेल है जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है.

दहेज निषेध अधिनियम लागू हुए 60 साल से अधिक हो गए, लेकिन आंकड़े साफ दिखा रहे हैं कि यह प्रथा अब भी गहराई से समाज में जमी हुई है. यह आंकड़े सिर्फ सरकारी रिपोर्ट नहीं, बल्कि एक सच्चाई का आईना हैं कि मध्य प्रदेश में दहेज हत्याएं घटने के बजाय लगातार बढ़ रही हैं.

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